Ria Khurana

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Chirkut बाबा के Crazy वचन

दाढ़ी और मूंछ के सफ़ेद बालो का करे उपचार -<br>बाल सफेद होने का कारण पैतृक प्रभाव भी होता है या बहुत ज्यादा तनाव लेना या बहुत ज्यादा सोंचना तथा शराब का …

Chirkut बाबा के Crazy वचन

बहुत सुन्दर सन्देश -::<br>.<br>.<br>अगर आप किसी को छोटा देख<br>रहे हो तो आप उसे.........<br>या तो "दूर" से देख रहे हो<br>या अपने "गुरुर" से देख रहे हो !!<p>See More

Chirkut बाबा के Crazy वचन

।। आज का ज्ञान ।।<p>1.जितना कमाएँ उससे कम खर्च हो ऐसी जिन्दगी बनायें<br>2. दिन में कम से कम 3 लोगो की प्रशंसा करें<br>3. खुद की भूल स्वीकारने में कभी भी संकोच न …

Chirkut बाबा के Crazy वचन

जबरजस्त फाडू आयुर्वेदिक नुश्खों का संकलन<p>आयुर्वेदिक दोहे<br>१Ⓜ<br>दही मथें माखन मिले, ...<br>केसर संग मिलाय,<br>होठों पर लेपित करें,<br>रंग गुलाबी आय..<br>२Ⓜ<br>बहती यदि जो नाक …

Chirkut बाबा के Crazy वचन

बदकिस्मत कौन ?<br>सफलता का श्रेय किसे ?<p>एक बार यात्रियों से भरी एक बस कहीं जा रही थी। अचानक मौसम बदला धुलभरी आंधी के बाद बारिश की बूंदे गिरने लगी बारिश …

Chirkut बाबा के Crazy वचन

4-6 लाइने है थोडा धयान जरुर दीजियेगा<p>एक साधू गली से जा रहा था । गली से जाते हुए उसकी नज़र एक लड़की पर पड़ी । जो पास में खड़े अपने यार (boy frnd) को …

कैसे भक्ति से पाएं अद्भुत शक्ति, जानिए स्वयं हनुमानजी का बताया रहस्य (सिर्फ हिन्दू धर्म शास्त्रों को मानने वाले पढ़ें, नास्तिक/शास्त्र विरोधी ignore करें) --------------------- इंसान ज़िंदगी को सुकूनभरा बनाने के लिए हर दिन जूझता है। हालांकि, यह भी सच है कि सुख और दु:ख से भरे ज़िंदगी के सफर को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए गुण, योग्यता, विचार और शक्तियां अहम होती हैं, लेकिन सुरक्षित रहने और दु:खों से परे रहने की सोच और उतावलापन कई मौकों पर इंसान को सुकून के बजाए ज्यादा चिंता में डूबो देता है। धर्मशास्त्रों में ऐसे ही दु:खों और चिंता से परे जीवन के लिए ऐसे सूत्र बताए गए हैं, जिनमें समाए अर्थ को गंभीरता से समझा जाए तो वह जीवन में संतुलन लाने के साथ तमाम मुश्किलों से निजात दिला सकते हैं। इसी कड़ी में संकटमोचक देवता और संयम की सीख देने वाले आदर्श देवता हनुमानजी का दु:ख व तनावों से बचने के लिए उजागर भक्ति से जुड़ा रहस्य व्यावहारिक जीवन को साधने के लिए बहुत ही सटीक और कारगर सूत्र भी है। हिन्दू धर्मगंथों के मुताबिक हनुमानजी चिरंजीवी यानी अमर देवता माने गए हैं। माना जाता है कि वे हर युग में सशरीर मौजूद होते हैं। इसलिए उनका किसी भी रूप में स्मरण हर संकट व दुःख को टालने वाला माना गया है। श्रीहनुमान चरित्र का एक सुखद पहलू है ‘भक्ति’। इससे जुड़े सुख-शांति के कई सूत्र सांसारिक जीवन में भी कलह व संताप दूर कर देते हैं। इसी कड़ी में रामचरितमानस में श्रीहनुमान के बोल हैं कि– कह हनुमंत बिपत्ति प्रभु सोई। जब तब सुमिरन भजन न होई।। इस चौपाई में श्रीहनुमान द्वारा देव स्मरण, भक्ति और समर्पण की अहमियत बताते हुए जीवन को सुखी बनाने का बहुत ही अच्छा संदेश दिया है। इसमें दु:ख को अच्छा मानते हुए संकेत है कि साधारण इंसान दु:ख को मुसीबत मानता है, लेकिन वास्तव में दु:ख, सुख से श्रेष्ठ इसलिए हो जाता है कि ऐसे वक्त में ही भगवान की याद आती है। इसके विपरीत बुरा समय तो वह होता है जब भगवान का स्मरण न हो। व्यावहारिक रूप से प्रेरणा यही है कि चूंकि बुरा वक्त इंसान को सोने की तरह तपाकर निखारने वाला होता है। कहा भी जाता है कि सांसारिक जीवन में सुख के साथी प्राणी व दुःख के भगवान होते हैं। इसलिए ऐसे वक्त हिम्मत हारकर रुकने के बजाय इंसान ईश्वर और खुद पर विश्वास रख आगे बढ़ता चले। साथ ही वह दु:ख ही नहीं, बल्कि सुखों में भी अहंकार से परे रहे। सुख-दुःख दोनों को ही ईश्वर की देन मानकर हमेशा सरल और सहज भाव से देव स्मरण कर ज़िंदगी गुजारता चले। श्रीहनुमान के इस सूत्र को अपनाने वाला इंसान बड़े से बड़े दु:ख में भी अस्थिर और अशांत नहीं होगा।

स्त्री हो या पुरुष, किस्मत चमकाने के लिए सुबह जागते ही ये 1 काम करना चाहिए ***************************** यदि आप जीवनभर सुखी और धनवान रहना चाहते हैं तो प्राचीन समय में कुछ खास उपाय बताए गए हैं। इन उपायों से आप मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा के लिए प्राप्त कर सकते हैं। महालक्ष्मी को प्रसन्न करने का एक ऐसा ही चमत्कारी उपाय आपको सुबह-सुबह बिस्तर छोडऩे से पहले ही कर लेना चाहिए। यहां दिए गए फोटो में जानिए कौन सा है ये चमत्कारी उपाय और ये कैसे दिलाता महालक्ष्मी की कृपा... सुबह उठते ही सबसे पहले क्या करना चाहिए कि हमारा पूरा दिन अच्छा रहे और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहे? कई लोग भगवान के दर्शन करते हैं तो कुछ अपने घर के सदस्यों का चेहरा देखते हैं। ऐसा माना जाता है कि शुरुआत अच्छी हो अंत भी अच्छा होता है। इसी वजह से यदि आपकी सुबह की शुरुआत सही होगी तो दिनभर चमत्कारी फल अवश्य प्राप्त होंगे। स्त्री हो या पुरुष रोज सुबह बिस्तर छोडऩे से पहले अपने हाथों के दर्शन करने चाहिए। यदि आप सोचते हैं कि केवल हाथों के दर्शन से क्या होगा? तो इस प्रश्न का उत्तर धर्म ग्रंथों में दिए इस मंत्र में छिपा हुआ है- कराग्रे वसति लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविंद: प्रभाते करदर्शनम्॥ इस मंत्र में बताया गया है कि सुबह-सुबह हमें अपने हाथों के दर्शन क्यों करने चाहिए। यह प्राचीन समय से चली आ रही परंपरा है और आज भी जो लोग इसका पालन करते हैं उनके जीवन में सुख और शांति के साथ धन की पूर्ति भी बनी रहती है। रोज सुबह अपने हाथों के दर्शन करने के साथ ही इस मंत्र का जप भी करना चाहिए। मंत्र: कराग्रे वसति लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविंद: प्रभाते करदर्शनम्॥ इस मंत्र में बताया गया है कि हमारे हाथों के अग्रभाग (आगे) की ओर महालक्ष्मी का वास होता है। हाथ के मध्यभाग में सरस्वती और हाथ के मूलभाग में भगवान विष्णु का वास होता है। अत: प्रात:काल दोनो हाथों के दर्शन करना चाहिये। हाथों के दर्शन करते हुए मंत्र का जप करने के बाद दोनों हाथों को अपने चेहरे पर फेर लेना चाहिए। यह उपाय चमत्कारिक है। प्राचीन ऋषि-मुनियों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि हमारे हाथों की हथेलियों में दैवीय शक्तियां निवास करती हैं। जिनसे में दिनभर के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है। जो लोग रोज सुबह यह काम करते हैं उनकी आंखों की रोशनी में कमी नहीं आती है। चश्मा नहीं चढ़ता है और यदि चश्मा लगा हो उसके नंबर बढऩे की संभावनाएं बहुत कम हो जाती हैं। आंखों की सुरक्षा के लिए भी सुबह हथेलियों को आंखों पर फेरना लाभदायक होता है। इसी वजह से हमें सुबह उठते ही सबसे पहले अपने हाथों की हथेलियों के दर्शन करने चाहिए। दोनों हाथों को मिलाकर उसके दर्शन करके ही बिस्तर छोडऩा चाहिए। ऐसा करने पर आपकी सुबह शुभ होगी और दिनभर कार्यों में सफलता मिलती रहेगी। हाथों के दर्शन करने के बाद जब आप पलंग से नीचे उतरते हैं तो उस समय भूमि को भी प्रणाम करना चाहिए। यानी नीचे फर्श को स्पर्श करके प्रणाम करना चाहिए। इसके साथ ही भूमि माता से उस पर पैर रखने के लिए क्षमा याचना करना चाहिए। ऐसा करने पर भूमि माता की कृपा प्राप्त होती है। हिंदू धर्म में भूमि को भी माता का स्थान दिया गया है। भूमि ही अन्न, जल और संपदा प्रदान करती है। इसी की कृपा से हम जीवित रहते हैं। अत: सुबह भूमि पर पैर रखने से भूमि का अपमान होता है और इसी के लिए हमें भूमि माता से क्षमा याचना करनी चाहिए। इस परंपरा के पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी है जो कि हमारे स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। पलंग पर सोते समय हम चादर या रजाई ओढ़कर सोते हैं और इसकारण पूरे शरीर की गर्मी हमारे पैरों में बढ़ जाती है। ऐसे में यदि सुबह हम एकदम पैर जमीन पर रख देंगे तो गर्म पैर ठंडी जमीन पर पडऩे से स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। सर्दी-जुकाम जैसी समस्या होने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। अत: बिस्तर छोडऩे से पहले कंबल, रजाई या चादर हटाकर कुछ देर पलंग ही रुकना चाहिए ताकि शरीर का तापमान सामान्य हो जाए। इसके बाद भूमि माता को प्रणाम करके पलंग से नीचे उतरें।

एक पुराना उपाय, घर में बनी रहेगी लक्ष्मी कृपा ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे इसलिए कई प्रकार के शुभ चिह्न बनाने की परंपरा पुराने समय से ही चली आ रही है। यदि आप भी अपने घर पर महालक्ष्मी कृपा चाहते हैं तो यहां एक प्राचीन उपाय बताया जा रहा है जिससे आपके घर में कभी भी दरिद्रता नहीं आएगी। शास्त्रों के अनुसार कई शुभ चिन्ह बताए गए हैं जो घर से सभी परेशानियों को दूर रखते हैं। इन्हीं चिह्नों में स्वस्तिक, ऊँ, ऊँ नम: शिवाय, श्री, श्रीगणेश आदि शामिल हैं। ऐसा ही एक चमत्कारी चिन्ह है महालक्ष्मी के चरण चिह्न। महालक्ष्मी के चरणों के चिह्न स्टीकर के रूप में आसानी से बाजार में मिल जाते हैं। परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे जीवन के लिए जरूरी है कि घर के मुख्य द्वार पर कोई ना कोई शुभ चिन्ह अवश्य लगाया जाए। कुछ चिन्ह मुख्य द्वार पर या दीवार पर ऊपर की ओर लगाए जाते हैं लेकिन कुछ चिन्ह दरवाजे के नीचे भी लगाने चाहिए। महालक्ष्मी के चरण चिह्न को दरवाजे के बाहर की ओर लगाना चाहिए। घर में समृद्धि तभी बनी रहेगी जब सदस्यों के पास पर्याप्त धन हो और धन महालक्ष्मी की कृपा से ही प्राप्त होता है। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार उपाय बताए गए हैं इन्हीं में से एक है देवी के पैरों के निशान मुख्य द्वार के नीचे जमीन पर लगाना। इस उपाय से आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाएगी और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहेगी। देवी लक्ष्मी के लाल रंग के चरणों के चिन्ह से सभी देवी-देवताओं की शुभ दृष्टि हमारे घर और परिवार के सदस्यों पर सदैव बनी रहती है। ज्योतिष के अनुसार चरण चिह्न से अशुभ ग्रहों का बुरा प्रभाव भी कम होता है। इसके अलावा हमारे घर पर किसी की बुरी नजर नहीं लगती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। सभी सदस्यों में पॉजीटिव एनर्जी का संचार होता है।

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हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाने की ये है असली वजह, कम ही लोग जानते हैं ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ वैसे तो सिंदूर सुहाग का प्रतीक है और इसे सभी सुहागन स्त्रियों द्वारा मांग में लगाने की परंपरा है। सिंदूर का पूजन-पाठ में भी गहरा महत्व है। बहुत से देवी-देवताओं को सिंदूर अर्पित किया जाता है। श्री गणेश, माताजी, भैरव महाराज के अतिरिक्त मुख्य रूप से हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाया जाता है। यहां जानिए बजरंग बली को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है? हनुमानजी का चोला सिंदूर से ही क्यों चढ़ाया जाता है? हनुमानजी का पूरा शृंगार ही सिंदूर से किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार हर युग में बजरंग बली की आराधना सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली मानी गई है। हनुमानजी श्रीराम के अनन्य भक्त हैं और जो भी इन पर आस्था रखता है उनके सभी कष्टों को ये दूर करते हैं। हनुमानजी को सिंदूर क्यों लगाया जाता है? इस संबंध में शास्त्रों में एक प्रसंग बताया गया है, जो कि काफी प्रचलित है। इसके अलावा सिंदूर से चोला चढ़ाने के पीछे कुछ और भी कारण हैं। मूर्तियों का शृंगार करने के पीछे एक कारण यह भी है कि शृंगार से मूर्तियों की सुंदरता बढ़ती है। भगवान की शक्ल शृंगार से ही अधिक उभरती है, जिससे उनकी भक्ति करने वाले भक्त को देवी-देवताओं के होने का आभास प्राप्त होता है। इसके अलावा शृंगार से मूर्ति की सुरक्षा भी होती है। यदि शृंगार न किया जाए तो मूर्तियां समय के साथ पुरानी होकर खंडित हो सकती है। शृंगार के अभाव में मूर्ति से देवी-देवताओं के चेहरे दिखाई देना बंद हो सकते हैं। इन्हीं कारणों से हनुमानजी के मूर्तियों पर भी सिंदूर से चोला चढ़ाया जाता है ताकि मूर्ति की सुंदरता भी बनी रहे और उसकी सुरक्षा भी होती रहे। श्रीरामचरित मानस के अनुसार एक बार हनुमानजी ने माता सीता को मांग में सिंदूर लगाते हुए देखा। तब उनके मन में जिज्ञासा जागी कि माता मांग में सिंदूर क्यों लगाती है? यह प्रश्न उन्होंने माता सीता से पूछा। इसके जवाब में सीता ने कहा कि वे अपने स्वामी, पति श्रीराम की लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं। शास्त्रों के अनुसार सुहागन स्त्री मांग में सिंदूर लगाती है तो उसके पति की आयु में वृद्धि होती है और वह हमेशा स्वस्थ रहते हैं। माता सीता का उत्तर सुनकर हनुमानजी ने सोचा कि जब थोड़े सा सिंदूर लगाने का इतना लाभ है तो वे पूरे शरीर पर सिंदूर लगाएंगे तो उनके स्वामी श्रीराम हमेशा के लिए अमर हो जाएंगे। यही सोचकर उन्होंने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाना प्रारंभ कर दिया। तभी से बजरंग बली को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। वैसे तो सभी के जीवन में समस्याएं सदैव बनी रहती हैं लेकिन यदि किसी व्यक्ति के जीवन में अत्यधिक परेशानियां उत्पन्न हो गई है और उसे कोई रास्ता नहीं मिल रहा हो तब हनुमानजी की सच्ची भक्ति से उसके सारे बिगड़े कार्य बन जाएंगे। दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाएगा। प्रतिदिन हनुमान के चरणों का सिंदूर अपने सिर या मस्तक पर लगाने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और विचार सकारात्मक बनते हैं। जीवन की परेशानियां दूर हो जाती हैं।

घर से निकलते समय पहले सीधा पैर बाहर रखें क्योंकि... ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ यदि शुरुआत सही हो तो हमारे काम भी सही और पूर्ण हो जाते हैं। अत: हम जब भी घर से बाहर जाते हैं तो कुछ परंपरागत बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे घर से निकलते समय पहले सीधा पैर बाहर रखना चाहिए। यहां जानिए इस काम से हमें क्या-क्या लाभ प्राप्त होते हैं... अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग घर निकलते वक्त सीधा पैर पहले बाहर रखने की बात कहते हैं। ऐसा माना है इससे हमारा दिन शुभ होता है और कार्य सफल होते हैं। जब भी हम घर से किसी खास कार्य को लक्ष्य बनाकर निकलते हैं उस वक्त सीधा पैर पहले बाहर रखने से निश्चित ही आपको कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। यह परंपरा काफी पुरानी है जिसे हमारे घर के बुजूर्ग समय-समय पर बताते रहते हैं। इस प्रथा के पीछे मनोवैज्ञानिक और धार्मिक कारण दोनों ही हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार सीधा पैर पहले बाहर रखना शुभ माना जाता है। सभी धर्मों में दाएं अंग का खास महत्व बताया गया है। सीधे हाथ से किए जाने वाले शुभ कार्य ही देवी-देवताओं द्वारा मान्य किए जाते हैं। देवी-देवताओं की कृपा के बिना कोई भी व्यक्ति किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। इसी कारण सभी पूजन कार्य सीधे हाथ से ही किए जाते हैं। जब भी घर से बाहर जाते हैं तो सीधा पैर ही पहले बाहर रखते हैं ताकि कार्य की ओर पहला कदम शुभ हो, इससे कार्य में सफल होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इस परंपरा के पीछे एक तथ्य और है कि इसका हम पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। सीधा पैर पहले बाहर रखने से हमें सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और मन प्रसन्न रहता है। इस बात का हम पर दिनभर प्रभाव रहता है। बाएं पैर को पहले बाहर निकालने पर हमारे विचार नकारात्मक बनते हैं। इसके साथ ही घर से निकलने से पहले थोड़ा सा दही खाकर निकलना चाहिए। माता-पिता का आशीर्वाद लेना चाहिए और देवी-देवताओं का ध्यान करके कार्य की ओर निकलेंगे तो सफलता के प्रबल योग बनते हैं।

मंदिर जाने के चमत्कार जानेंगे तो आप भी रोज जाएंगे मंदिर ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ मंदिर और उसमें स्थापित भगवान की मूर्ति हमारे लिए आस्था के केंद्र हैं। मंदिर हमारे धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं और हमारे भीतर आस्था जगाते हैं। किसी भी मंदिर को देखते ही हम श्रद्धा के साथ सिर झुकाकर भगवान के प्रति नतमस्तक हो जाते हैं। आमतौर पर हम मंदिर भगवान के दर्शन और इच्छाओं की पूर्ति के लिए जाते हैं लेकिन मंदिर जाने के और कई लाभ भी हैं। यहां जानिए मंदिर जाने से हमें क्या-क्या चमत्कारी लाभ प्राप्त होते हैं... मंदिर वह स्थान है जहां जाकर मन को शांति का अनुभव होता है। वहां हम अपने भीतर नई शक्ति का अहसास करते हैं। हमारा मन-मस्तिष्क प्रफुल्लित हो जाता है। शरीर उत्साह और उमंग से भर जाता है। मंत्रों के स्वर, घंटे-घडिय़ाल, शंख और नगाड़े की ध्वनियां सुनना मन को अच्छा लगता है। इन सभी के पीछे है, ऐसे वैज्ञानिक कारण जो हमें प्रभावित करते हैं। मंदिरों का निर्माण पूर्ण वैज्ञानिक विधि है। मंदिर का वास्तुशिल्प ऐसा बनाया जाता है, जिससे वहां शांति और दिव्यता उत्पन्न होती है। मंदिर की वह छत जिसके नीचे मूर्ति की स्थापना की जाती है। ध्वनि सिद्धांत को ध्यान में रखकर बनाई जाती है, जिसे गुंबद कहा जाता है। गुंबद के शिखर के केंद्र बिंदु के ठीक नीचे मूर्ति स्थापित होती है। गुंबद तथा मूर्ति का मध्य केंद्र एक रखा जाता है। गुंबद के कारण मंदिर में किए जाने वाले मंत्रोच्चारण के स्वर और अन्य ध्वनियां गूंजती है तथा वहां उपस्थित व्यक्ति को प्रभावित करती है। गुंबद और मूर्ति का मध्य केंद्र एक ही होने से मूर्ति में निरंतर ऊर्जा प्रवाहित होती है। जब हम उस मूर्ति को स्पर्श करते हैं, उसके आगे सिर टिकाते हैं, तो हमारे अंदर भी ऊर्जा प्रवाहित हो जाती है। इस ऊर्जा से हमारे अंदर शक्ति, उत्साह, प्रफुल्लता का संचार होता है। मंदिर की पवित्रता हमें प्रभावित करती है। हमें अपने अंदर और बाहर इसी तरह की शुद्धता रखने की प्रेरणा मिलती है। मंदिर में बजने वाले शंख और घंटों की ध्वनियां वहां के वातावरण में कीटाणुओं को नष्ट करते रहती हैं। घंटा बजाकर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करना हमें शिष्टाचार सिखाता है कि जब हम किसी के घर में प्रवेश करें तो पूर्व में सूचना दें। घंटे का स्वर देवमूर्ति को जाग्रत करता है, ताकि आपकी प्रार्थना सुनी जा सके। शंख और घंटे-घडिय़ाल की ध्वनि दूर-दूर तक सुनाई देती है, जिससे आसपास से आने-जाने वाले अंजान व्यक्ति को पता चल जाता है कि आसपास कहीं मंदिर है। मंदिर में स्थापित देव प्रतिमा में हमारी आस्था और विश्वास होता है। मूर्ति के सामने बैठने से हम एकाग्र होते हैं। यही एकाग्रता धीरे-धीरे हमें भगवान के साथ एकाकार करती है, तब हम अपने अंदर ईश्वर की उपस्थिति को महसूस करने लगते हैं। एकाग्र होकर चिंतन-मनन से हमें अपनी समस्याओं का समाधान जल्दी मिल जाता है। मंदिर में स्थापित देव प्रतिमाओं के सामने नतमस्तक होने की प्रक्रिया से हम अनजाने ही योग और व्यायाम की सामान्य विधियां पूरी कर लेते हैं। इससे हमारे मानसिक तनाव, शारीरिक थकावट, आलस्य दूर हो जाते हैं। मंदिर में परिक्रमा भी की जाती है, जिसमें पैदल चलना होता है। मंदिर परिसर में हम नंगे पैर पैदल ही घूमते हैं। यह भी एक व्यायाम है। नए शोध में साबित हुआ है नंगे पैर मंदिर जाने से पगतलों में एक्यूपे्रशर होता है। इससे पगतलों में शरीर के कई भीतरी संवेदनशील बिंदुओं पर अनुकूल दबाव पड़ता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इस तरह हम देखते हैं कि मंदिर जाने से हमे बहुत लाभ है। मंदिर को वैज्ञानिक शाला के रूप में विकसित करने के पीछे हमारे पूर्वज ऋषि-मुनियों का यही लक्ष्य था कि सुबह जब हम अपने काम पर जाएं उससे पहले मंदिर से ऊर्जा लेकर जाएं, ताकि अपने कर्तव्यों का पालन सफलता के साथ कर सकें और जब शाम को थककर वापस आएं तो नई ऊर्जा प्राप्त करें। इसलिए दिन में कम से कम एक या दो बार मंदिर अवश्य जाना चाहिए। इससे हमारी आध्यात्मिक उन्नति तो होती है, साथ ही हमें निरंतर ऊर्जा मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है।

सुंदरकांड का पाठ क्यों किया जाता है, जानिए खास बातें ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ अक्सर शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। जब भी किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा परेशानियां हों, कोई काम नहीं बन रहा हो, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो, सुंदरकांड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं। कई ज्योतिषी और संत भी विपरीत परिस्थितियों में सुंदरकांड का पाठ करने की सलाह देते हैं। यहां जानिए सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से क्यों किया जाता है? सुंदरकांड के लाभ से मिलता है मनोवैज्ञानिक लाभ वास्तव में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम के गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती है। सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का कांड है। मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला कांड है। सुंदरकांड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है। हनुमानजी जो कि वानर थे, वे समुद्र को लांघकर लंका पहुंच गए और वहां सीता की खोज की। लंका को जलाया और सीता का संदेश लेकर श्रीराम के पास लौट आए। यह एक भक्त की जीत का कांड है, जो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा चमत्कार कर सकता है। सुंदरकांड में जीवन की सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र भी दिए गए हैं। इसलिए पूरी रामायण में सुंदरकांड को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यह व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ाता है। इसी वजह से सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से किया जाता है। सुंदरकांड के लाभ से मिलता है धार्मिक लाभ हनुमानजी की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी गई है। बजरंग बली बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। शास्त्रों में इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताए गए हैं, इन्हीं उपायों में से एक उपाय सुंदरकांड का पाठ करना है। सुंदरकांड के पाठ से हनुमानजी के साथ ही श्रीराम की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। किसी भी प्रकार की परेशानी हो, सुंदरकांड के पाठ से दूर हो जाती है। यह एक श्रेष्ठ और सबसे सरल उपाय है। इसी वजह से काफी लोग सुंदरकांड का पाठ नियमित रूप करते हैं। हनुमानजी के पूजन में ध्यान रखें ये सामान्य नियम हर युग में श्रीराम के अनन्य भक्त बजरंग बली श्रद्धालुओं के दुखों को दूर करके उन्हें सुखी और समृद्धिशाली बनाते हैं। इसी कारण आज इनके भक्तों की संख्या काफी अधिक है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमानजी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। हनुमानजी के पूजन और दर्शन के लिए शास्त्रों के अनुसार कुछ नियम बताए गए हैं, पूजन और दर्शन करते समय इन नियमों का पालन चाहिए। - हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है। भक्तों को इनकी तीन परिक्रमा ही करनी चाहिए। - दोपहर के समय बजरंग बली को गुड़, घी, गेहूं के आटे से बनी रोटी का चूरमा अर्पित किया जा सकता है। - हनुमानजी को शाम के समय फल जैसे आम, केले, अमरूद, सेवफल आदि का भोग लगाना चाहिए। - सुंदरकांड का पाठ करते समय हनुमानजी को सिंदूर, चमेली का तेल और अन्य पूजन सामग्री भी अर्पित करना चाहिए।

गणेशजी को क्यों लगाना चाहिए लड्डुओं का भोग, जानिए ये खास वजहें -------------- हिन्दू धर्म परंपराओं में बुधवार का दिन सभी सुखों का मूल बुद्धि के दाता भगवान श्री गणेश की उपासना का दिन है। श्रीगणेश की प्रसन्नता के लिए कई विधि-विधान शास्त्रों में बताए गए हैं, जो सरल भी हैं व शुभ फलदायी भी। इसी कड़ी में श्रीगणेश को विशेष रूप से मोदक या लड्डू चढ़ाने की भी परंपरा है। माना जाता है कि गणेशजी को मोदक बहुत प्रिय है। आखिर श्रीगणेश को मोदक ही प्रिय क्यों है और क्यों खासकर बुधवार के दिन मोदक का भोग लगाने का खास महत्व है? जानिए, इस विषय से जुड़ीं रोचक बातें। दरअसल, हिन्दू धर्मशास्त्रों के मुताबिक कलियुग में भगवान गणेश के धूम्रकेतु रूप की पूजा की जाती है। जिनकी दो भुजाएं हैं। किंतु मनोकामना सिद्धि के लिये बड़ी आस्था से भगवान गणेश का चार भुजाधारी स्वरूप पूजनीय है, जिनमें से एक हाथ में अंकुश, दूसरे हाथ में पाश, तीसरे हाथ में मोदक व चौथे में आशीर्वाद है। सामान्यतः श्रीगणेश के हाथों में मोदक या लड्डू होने की वजह उनका प्रिय व्यंजन होना ही माना जाता है। जबकि धर्म दर्शन इसमें प्रतीक रूप में जीवन से संदेश व गूढ़ रहस्य उजागर करता है। दरअसल, मोदक का अर्थ है- जो मोद (आनन्द) देता है, जिससे आनन्द प्राप्त हो, संतोष हो, इसके अर्थ में गहराई यह है तन का आहार हो या मन के विचार वह सात्विक और शुद्ध होना जरूरी है। तभी आप जीवन का वास्तविक आनंद पा सकते हैं। दरअसल, धर्म व आध्यात्मिक नजरिए से मोदक ज्ञान का प्रतीक भी है। जैसे मोदक को थोड़ा-थोड़ा और धीरे-धीरे खाने पर उसका स्वाद और मिठास अधिक आनंद देती है और अंत में मोदक खत्म होने पर आप तृप्त हो जाते हैं, उसी तरह वैसे ही ऊपरी और बाहरी ज्ञान व्यक्ति को आनंद नही देता परंतु ज्ञान की गहराई में सुख और सफलता की मिठास छुपी होती है। इस तरह जो अपने कर्म के फलरूपी मोदक भगवान के हाथ में रख देता है उसे प्रभु आशीर्वाद देते हैं। यही श्रीगणेश के हाथ में मोदक होने और उनके प्रिय भी होने के पीछे का संदेश है। बुधवार के स्वामी बुध ग्रह भी है, जो बुद्धि के कारक भी माने जाते हैं। वहीं गणेशजी भी बुद्धिदाता देवता हैं। इस तरह बुद्धि प्रधानता वाले इस दिवस पर बुद्धि के स्वामी गणेशजी की मोदक का भोग लगाकर पूजा प्रखर बुद्धि व संकल्प के साथ सुख-सफलता व शांति की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा से भर देती है। ऐसी सद्प्रेरणा ही दुर्गति से बचाने वाली व तमाम विघ्न, बाधाओं का अंत करने वाली सिद्ध होती है।

रात में शिवलिंग के पास लगाना चाहिए दीपक, जानिए ऐसा क्यों ************************** महालक्ष्मी की कृपा पाने और मालामाल बनने के लिए एक बहुत प्राचीन उपाय बताया गया है, वह उपाय है रोज रात में शिवलिंग के पास दीपक लगाना। जो भी व्यक्ति रोज रात में किसी सिद्ध शिव मंदिर जाकर वहां शिवलिंग के पास दीपक जलाता है, उसे सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और उसके जीवन से धन की कमी दूर हो जाती है। यह उपाय आज भी चमत्कारी रूप से शुभ फल प्रदान करता है। ऐसा नियमित रूप से करने पर व्यक्ति की कुंडली के सभी ग्रह दोष दूर हो जाते हैं। बुरा समय टल जाता है, यदि कोई अनहोनी होने वाली हो तो वह भी इस उपाय से टल सकती है। रात के समय जब घोर अंधेरा रहता है, तब शिवलिंग के समीप प्रकाश करने पर महादेव अतिप्रसन्न होते हैं। शिवपुराण के अनुसार शिवजी की इच्छा मात्र से इस सृष्टि का निर्माण हुआ है, इसी वजह से भोलेनाथ की प्रसन्नता से सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार प्राचीन काल कुबेर देव (देवताओं के कोषाध्यक्ष) पूर्व जन्म में चोर थे। वे मंदिरों की धन-संपदा चोरी किया करते थे। एक रात वे भगवान शिव के मंदिर में चोरी करने पहुंच गए। रात होने की वजह से वहां काफी अंधेरा था। अंधेरे में चोर को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। तब उस चोर ने चोरी करने के लिए एक दीपक जलाया। दीपक के प्रकाश में उन्हें मंदिर की धन संपत्ति साफ-साफ दिखाई देने लगी। वह चोर मंदिर का सामान चोरी कर ही रहा था कि हवा से दीपक बुझ गया। उस व्यक्ति ने पुन: दीपक जलाया, थोड़ी देर हवा से दीपक फिर बुझ गया और कुबेर ने पुन: दीया प्रज्जवलित कर दिया। यह प्रक्रिया कई बार हुई। रात के समय शिवजी के समक्ष दीपक लगाने पर उनकी असीम कृपा प्राप्त हो जाती है। कुबेर यह बात नहीं जानते थे, लेकिन रात के समय बार-बार दीपक जलाने से भोलेनाथ कुबेर से अति प्रसन्न हो गए। कुबेर ने चोरी करते समय बार-बार दीपक जलाकर अनजाने में ही शिवजी की पूजा की थी, इसके फलस्वरूप महादेव ने उस चोर को अगले जन्म में देवताओं का कोषाध्यक्ष नियुक्त कर दिया। तभी से कुबेर देव महादेव के परमभक्त और धनपति हो गए। इस कथा के अनुसार जो भी व्यक्ति रात के समय शिव मंदिर में प्रकाश करता है, उसे महादेव की विशेष कृपा प्राप्त हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार कुबेर देव रावण के सोतेले भाई हैं और इन्हें भगवान शंकर द्वारा धनपाल होने का वरदान दिया गया है। रावण और कुबेर देव के पिता विश्रवा ऋषि थे। विश्रवा ऋषि की दो पत्नियां थीं इडविडा और कैकसी। कुबेर देव की माता इडविडा है और वे ब्राह्मण कुल की कन्या थीं। रावण की माता कैकसी हैं। कैकसी एक असुर कन्या थीं, इसी वजह से रावण असुर प्रवृत्ति का था। आमतौर पर कुबेर देव की जो प्रतिमाएं दिखाई देती हैं, वह स्थूल शरीर वाली और बेडोल होती हैं। कुछ शास्त्रों में कुबेर देव को कुरूप बताया गया है, जबकि कुछ ग्रंथों में कुबेर देव को राक्षस माना गया है। कुबेर देव को यक्ष भी बताया गया है। यक्ष भी धन के रक्षक ही होते हैं। यक्ष धन की केवल रक्षा करते हैं, उसे भोगते नहीं हैं। प्राचीन काल में जो मंदिर बनाए जाते थे, उनमें मंदिर के बाहर कुबेर की मूर्तियां भी होती थीं, क्योंकि कुबेर देव की मंदिर की धन-संपत्ति की रक्षा करते हैं। कुबेर देव का धन किसी खजाने के रूप में कहीं गड़ा हुआ या स्थिर पड़ा रहता है। कुबेर का निवास वटवृक्ष पर बताया गया है। ऐसे वृक्ष घर-आंगन में नहीं होते, गांव या नगर के केन्द्र में भी नहीं होते हैं, ऐसे पेड़ अधिकतर गांव-नगर के बाहर रहवासी इलाकों से दूर या बियाबान में ही होते हैं। शास्त्रों के अनुसार धन प्राप्ति के लिए देवी महालक्ष्मी की आराधना की जाना चाहिए। महादेवी के साथ ही धन के देवता कुबेर देव को पूजने से भी पैसों से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इसी वजह से किसी भी देवी-देवता के पूजन के साथ ही इनका भी पूजन करना बहुत लाभदायक होता है। जीवन में धन, सुख और समृद्धि बढ़ाने के लिए धर्म शास्त्रों के अनुसार कई उपाय बताए गए हैं। जिन्हें अपनाने से निश्चित ही शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं। इन्हीं उपायों में से एक उपाय यह है कि घर में कुबेर देव की मूर्ति या फोटो अवश्य रखना चाहिए क्योंकि इन्हें सुख-समृद्धि देने वाले देवता माना जाता है।

शनि पर तेल चढ़ाने से नहीं होती है पैसों की कमी, जानिए ऐसा क्यों ******************************************** हर शनिवार काफी लोग शनि को तेल अर्पित करते हैं। शनि को तेल अर्पित करने वाले अधिकांश लोग इस काम को सिर्फ प्राचीन परंपरा मानते हैं और वे यही सोचते हैं कि ऐसा करने पर शनि की कृपा प्राप्त होती है। इस परंपरा के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व की कई बातें छिपी हुई हैं, जिन्हें काफी कम लोग जानते हैं। शनि को तेल अर्पित करते समय ध्यान रखें ये बातें --------------------- अक्सर हर शनिवार को बाजार में या हमारे घर के आसपास शनि प्रतिमा को लिए हुए कुछ लोग दिखाई देते हैं। वे किसी बाल्टी में या किसी अन्य बर्तन में शनि प्रतिमा को रखते हैं और लोग उस पर तेल अर्पित करते हैं। प्रतिमा पर तेल अर्पित करते समय इच्छा अनुसार धन का दान भी करना चाहिए। साथ ही, साफ-सफाई और पवित्रता का भी ध्यान रखें। तेल चढ़ाने से पहले तेल में अपना चेहरा अवश्य देखें। ऐसा करने पर शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है। धन संबंधी कार्यों में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि बनी रहती है। शनि पर तेल चढ़ाने से जुड़ी वैज्ञानिक मान्यता --------------------- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे शरीर के सभी अंगों में अलग-अलग ग्रहों का वास होता है। यानी अलग-अलग अंगों के कारक ग्रह अलग-अलग हैं। शनिदेव त्वचा, दांत, कान, हड्डियां और घुटनों के कारक ग्रह हैं। यदि कुंडली में शनि अशुभ हो तो इन अंगों से संबंधित परेशानियां व्यक्ति को झेलना पड़ती हैं। इन अंगों की विशेष देखभाल के लिए हर शनिवार तेल मालिश की जानी चाहिए। शनि को तेल अर्पित करने का यही अर्थ है कि हम शनि से संबंधित शरीर के अंगों पर भी तेल लगाएं, ताकि इन अंगों को पीड़ाओं से बचाया जा सके। मालिश करने के लिए सरसो के तेल का उपयोग करना श्रेष्ठ रहता है। शनि पर तेल चढ़ाने से जुड़ी धार्मिक मान्यता ----------------------- इस परंपरा के लिए कई प्रकार की प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं। इन कथाओं में सर्वाधिक प्रचलित कथा का संबंध हनुमानजी से है। शास्त्रों के अनुसार रामायण काल में एक समय शनि को अपने बल और पराक्रम पर घमंड हो गया था। उस काल में हनुमानजी के बल और सामर्थ्य की कीर्ति चारों दिशाओं में फैली हुई थी। जब शनि को हनुमानजी के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई तो शनि बजरंग बली से युद्ध करने के लिए निकल पड़े। एक शांत स्थान पर हनुमानजी अपने स्वामी श्रीराम की भक्ति में लीन बैठे थे, तभी वहां शनिदेव आ गए और उन्होंने बजरंग बली को युद्ध के ललकारा। युद्ध की ललकार सुनकर हनुमानजी शनिदेव को समझाने का प्रयास किया, लेकिन शनि नहीं माने और युद्ध के लिए आमंत्रित करने लगे। अंत में हनुमानजी भी युद्ध के लिए तैयार हो गए। दोनों के बीच घमासान युद्ध हुआ। हनुमानजी ने शनि को बुरी तरह परास्त कर दिया। युद्ध में हनुमानजी द्वारा किए गए प्रहारों से शनिदेव के पूरे शरीर में भयंकर पीड़ा हो रही थी। इस पीड़ा को दूर करने के लिए हनुमानजी ने शनि को तेल दिया। इस तेल को लगाते ही शनिदेव की समस्त पीड़ा दूर हो गई। तभी से शनिदेव को तेल अर्पित करने की परंपरा प्रारंभ हुई। शनिदेव पर जो भी व्यक्ति तेल अर्पित करता है, उसके जीवन की समस्त परेशानियां दूर हो जाती हैं और धन अभाव खत्म हो जाता है। हनुमानजी की कृपा से शनि की पीड़ा शांत हुई थी, इसी वजह से आज भी शनि हनुमानजी के भक्तों पर विशेष कृपा बनाए रखते हैं। कौन हैं शनिदेव? ------------------------ सभी नौ ग्रहों में शनिदेव का स्थान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। शनि को न्यायाधीश का पद प्राप्त है। इस वजह से शनि ही हमारे कर्मों का शुभ-अशुभ फल प्रदान करते हैं। जिस व्यक्ति के जैसे कर्म होते हैं, ठीक वैसे ही फल शनि प्रदान करते हैं। ज्योतिष के अनुसार शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। शनि देव को अर्पित की जाने वाली वस्तुओं में लौहा, तेल, काले-नीले वस्त्र, घोड़े की नाल, काली उड़द, काले रंग का कंबल शामिल है। कब हुआ शनि का जन्म शास्त्रों के अनुसार हिन्दी पंचांग के ज्येष्ठ मास में आने वाली अमावस्या की रात में शनिदेव का जन्म हुआ था। शनिदेव के अन्य नाम शनि अत्यंत धीमे चलने वाला ग्रह है और इसे सूर्य की परिक्रमा करने के लिए 30 वर्ष लगते हैं। इसलिए शनि को मंद भी कहते हैं। शनै:-शनै: अर्थात धीरे-धीरे चलने के कारण इन्हें शनैश्चराय भी कहते हैं। शनि यमराज के बड़े भाई हैं, इसलिए इन्हें यमाग्रज भी कहा जाता हैं। रविपुत्र, नीलांबर, छायापुत्र, सूर्यपुत्र आदि भी शनि के नाम हैं। शनि का पारिवारिक परिचय शास्त्रों के अनुसार शनिदेव को सूर्य का पुत्र माना गया है। इनकी माता का नाम छाया है। सूर्य की पत्नी छाया के पुत्र होने के कारण इनका रंग काला है। मनु और यमराज शनि के भाई हैं तथा यमुनाजी इनकी बहन हैं। ऐसा माना जाता है शनि का विवाह चित्ररथ (गंधर्व) की कन्या से हुआ था। नौ ग्रहों से शनि का संबंध ज्योतिष में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु बताए गए हैं। - इन ग्रहों में बुध और शुक्र शनि के मित्र ग्रह हैं। - सूर्य, चंद्र और मंगल, ये तीनों शनि के शत्रु ग्रह माने गए हैं। - इनके अलावा गुरु से शनि सम भाव रखता है। - शेष दो ग्रह राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है। इन दोनों ग्रहों से भी शनि देव मैत्री भाव ही रखते हैं। शनि देव का स्वरूप शनिदेव का शरीर इंद्रनीलमणि के समान है। इनका रंग श्यामवर्ण माना जाता है। शनि के मस्तक पर स्वर्णमुकुट शोभित रहता है एवं वे नीले वस्त्र धारण किए रहते हैं। शनिदेव का वाहन कौआं है। शनि की चार भुजाएं हैं। इनके एक हाथ में धनुष, एक हाथ में बाण, एक हाथ में त्रिशूल और एक हाथ में वरमुद्रा सुशोभित है। शनिदेव का तेज करोड़ों सूर्य के समान बताया गया हैं। शनिदेव की प्रकृति शनिदेव न्याय, श्रम और प्रजा के देवता हैं। यदि किसी व्यक्ति के कर्म पवित्र हैं तो शनि सुखी-समृद्धि जीवन प्रदान करते हैं। किसानों के लिए शनि मददगार होते हैं। गरीब और असहाय लोगों पर शनि की विशेष कृपा रहती है। जो लोग किसी गरीब को परेशान करते हैं, उन्हें शनि के कोप का सामना करना पड़ता है। शनि पश्चिम दिशा के स्वामी हैं। वायु इनका तत्व है। साथ ही, शनि व्यक्ति के शारीरिक बल को भी प्रभावित करता है। शनि आराधना का मंत्र शनि आराधना के लिए कई मंत्र बताए गए हैं, लेकिन सबसे सरल और प्रभावी मंत्र इस प्रकार है- मंत्र: ऊँ शं श्नैश्चराय नम: इस मंत्र से शनि आराधना करने पर शनि बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। रुके हुए कार्य बनने लगते हैं।

आइये जानते हैं तुलसी के फायदे... 1. तुलसी रस से बुखार उतर जाता है। इसे पानी में मिलाकर हर दो-तीन घंटे में पीने से बुखार कम हो जाता है। 2. कई आयुर्वेदिक कफ सिरप में तुलसी का इस्तेमाल अनिवार्य है।यह टी.बी,ब्रोंकाइटिस और दमा जैसे रोंगो के लिए भी फायदेमंद है। 3. जुकाम में इसके सादे पत्ते खाने से भी फायदा होता है। 4. सांप या बिच्छु के काटने पर इसकी पत्तियों का रस,फूल और जडे विष नाशक का काम करती हैं। 5. तुलसी के तेल में विटामिन सी,कै5रोटीन,कैल्शियम और फोस्फोरस प्रचुर मात्रा में होते हैं। 6. साथ ही इसमें एंटीबैक्टेरियल,एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण भी होते हैं। 7. यह मधुमेह के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है।साथ ही यह पाचन क्रिया को भी मज़बूत करती हैं। 8. तुलसी का तेल एंटी मलेरियल दवाई के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। एंटीबॉडी होने की वजह से यह हमारी इम्यूनिटी भी बढा देती है। 9. तुलसी के प्रयोग से हम स्वास्थय और सुंदरता दोनों को ही ठीक रख सकते हैं। सावधानी : फायदे जानने के बाद तुलसी के सेवन में अति कर देना नुकसानदायक साबित होगा। क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए दिन भर में 10-12 पत्तों का ही सेवन करना चाहिए। खासतौर पर महिलाओं के लिए भले ही तुलसी एक वरदान की तरह है लेकिन फिर भी एक दिन में पांच तुलसी के पत्ते पर्याप्त हैं। हां, इसका सेवन छाछ या दही के साथ करने से इसका प्रभाव संतुलित हो जाता है। हालांकि यह आर्थराइटिस, एलर्जी, मैलिग्नोमा, मधुमेह, वायरल आदि रोगों में फायदा पहुंचाती है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान इसके सेवन का ध्यान रखना जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान अगर दर्द ज्यादा होता है तब तुलसी के काढे से फायदा पहुंच सकता है। इसमे तुलसी के पत्तो को रात भर पानी मे भिगो दें और सुबह उसे क्रश करके चीनी के साथ खाएं ब्रेस्ट- फीडिंग के दौरान भी तुलसी का काढा फायदेमंद होता है। इसके लिए बीस ग्राम तुलसी का रस और मकई के पत्तों रस मिलाएं, इसमें दस ग्राम अश्वगंधा रस और दस ग्राम शहद मिला कर खाएं। तुलसी बच्चेदानी को स्वास्थ रखने के लिए भी सहायक है। हां, एक बात ध्यान रहे कि आपके स्वास्थ पर तुलसी के अच्छे और बुरे दोनों प्रभाव पड सकते हैं इसलिए महिलाओं के लिए हो या बच्चों के लिए, बिना आयुर्वेदाचार्य से परामर्श लिए इसका इस्तेमाल न करे।

Chirkut बाबा के Crazy वचन

एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोजाना भोजन<br>पकाती थी और एक रोटी वह वहां से ...गुजरने वाले<br>किसी भी भूखे के लिए पकाती थी ,<br>वह उस रोटी को खिड़की के …

आइये जानते हैं तुलसी के फायदे... 1. तुलसी रस से बुखार उतर जाता है। इसे पानी में मिलाकर हर दो-तीन घंटे में पीने से बुखार कम हो जाता है। 2. कई आयुर्वेदिक कफ सिरप में तुलसी का इस्तेमाल अनिवार्य है।यह टी.बी,ब्रोंकाइटिस और दमा जैसे रोंगो के लिए भी फायदेमंद है। 3. जुकाम में इसके सादे पत्ते खाने से भी फायदा होता है। 4. सांप या बिच्छु के काटने पर इसकी पत्तियों का रस,फूल और जडे विष नाशक का काम करती हैं। 5. तुलसी के तेल में विटामिन सी,कै5रोटीन,कैल्शियम और फोस्फोरस प्रचुर मात्रा में होते हैं। 6. साथ ही इसमें एंटीबैक्टेरियल,एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण भी होते हैं। 7. यह मधुमेह के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है।साथ ही यह पाचन क्रिया को भी मज़बूत करती हैं। 8. तुलसी का तेल एंटी मलेरियल दवाई के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। एंटीबॉडी होने की वजह से यह हमारी इम्यूनिटी भी बढा देती है। 9. तुलसी के प्रयोग से हम स्वास्थय और सुंदरता दोनों को ही ठीक रख सकते हैं। सावधानी : फायदे जानने के बाद तुलसी के सेवन में अति कर देना नुकसानदायक साबित होगा। क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए दिन भर में 10-12 पत्तों का ही सेवन करना चाहिए। खासतौर पर महिलाओं के लिए भले ही तुलसी एक वरदान की तरह है लेकिन फिर भी एक दिन में पांच तुलसी के पत्ते पर्याप्त हैं। हां, इसका सेवन छाछ या दही के साथ करने से इसका प्रभाव संतुलित हो जाता है। हालांकि यह आर्थराइटिस, एलर्जी, मैलिग्नोमा, मधुमेह, वायरल आदि रोगों में फायदा पहुंचाती है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान इसके सेवन का ध्यान रखना जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान अगर दर्द ज्यादा होता है तब तुलसी के काढे से फायदा पहुंच सकता है। इसमे तुलसी के पत्तो को रात भर पानी मे भिगो दें और सुबह उसे क्रश करके चीनी के साथ खाएं ब्रेस्ट- फीडिंग के दौरान भी तुलसी का काढा फायदेमंद होता है। इसके लिए बीस ग्राम तुलसी का रस और मकई के पत्तों रस मिलाएं, इसमें दस ग्राम अश्वगंधा रस और दस ग्राम शहद मिला कर खाएं। तुलसी बच्चेदानी को स्वास्थ रखने के लिए भी सहायक है। हां, एक बात ध्यान रहे कि आपके स्वास्थ पर तुलसी के अच्छे और बुरे दोनों प्रभाव पड सकते हैं इसलिए महिलाओं के लिए हो या बच्चों के लिए, बिना आयुर्वेदाचार्य से परामर्श लिए इसका इस्तेमाल न करे।

मुंह में अगर छाले हो जाएं तो जीना मुहाल हो जाता है। खाना तो दूर पानी पीना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन, इसका इलाज आपके आसपास ही मौजूद है। मुंह के छाले गालों के अंदर और जीभ पर होते हैं। असंतुलित आहार, पेट में दिक्कत, पान- मसालों का सेवन छाले का प्रमुख कारण है। छाले होने पर बहुत तेज दर्द होता है। आइए हम आपको मुंह के छालों से बचने के लिए घरेलू उपचार बताते हैं। मुंह के छालों से बचने के घरेलू उपचार – शहद में मुलहठी का चूर्ण मिलाकर इसका लेप मुंह के छालों पर करें और लार को मुंह से बाहर टपकने दें। मुंह में छाले होने पर अडूसा के 2-3 पत्तों को चबाकर उनका रस चूसना चाहिए। छाले होने पर कत्था और मुलहठी का चूर्ण और शहद मिलाकर मुंह के छालों पर लगाने चाहिए। अमलतास की फली मज्जा को धनिये के साथ पीसकर थोड़ा कत्था मिलाकर मुंह में रखिए। या केवल अमलतास के गूदे को मुंह में रखने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं। अमरूद के मुलायम पत्तों में कत्था मिलाकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले से राहत मिलती है और छाले ठीक हो जाते हैं। सूखे पान के पत्ते का चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटिए, इससे मुंह के छाले समाप्त हो जाएंगे। पान के पत्तों का रस निकालकर, देशी घी में मिलाकर छालों पर लगाने से फायदा मिलता है और छाले समाप्त हो जाते हैं। नींबू के रस में शहद मिलाकर इसके कुल्ले करने से मुंह के छाले दूर होते हैं। ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी का सेवन कीजिए, इससे पेट साफ होगा और मुंह के छाले नहीं होंगे। मशरूम को सुखाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लीजिए, इस चूर्ण को छालों पर लगा दीजिए। मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे। मुंह के छाले होने पर चमेली के पत्तों को चबाइए। इससे छाले समाप्त हो जाते हैं। छाछ से दिन में तीन से चार बार कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक होते हैं। खाना खाने के बाद गुड चूसने से छालों में राहत होती है। मेंहदी और फिटकरी का चूर्ण बनाकर छालों पर लगाएं, इससे मुंह के छाले समाप्त होते हैं। अगर आपको बार-बार मुंह के छाले हो रहे हैं तो अपने मुंह की सफाई पर विशेष ध्यान दीजिए। ज्यादा मसालेदार और गरिष्ठ भोजन करने से बचें। अगर फिर भी छाले ठीक न हो रहे हों तो चिकित्सक से सलाह अवश्य कर लीजिए | CBPOSTMAY146

ॐ सूर्याय नमः सूर्यदेव चालीसा --------------- दोहा कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग। पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।। चौपाई जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर। भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर। विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन। अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते। सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि। अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़‍ि रथ पर। मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी। उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते। मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता, सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि, आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै। द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै। चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै। नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह। सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई। बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते। उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन। छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है। अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते। सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत। भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित। ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे। कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा। पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर। युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन। बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर। जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा। विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी। सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे। अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं। दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै। अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता। ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही। मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके। धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा। भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों। परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी। अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय। भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै। यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता। अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं। दोहा भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य। सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।। --------------- चालीसा - नयी श्रृंखला - प्रतिदिन सुबह 5 बजे अन्य सभी प्रकार की मनोरंजक, आध्यात्मिक आदि पोस्ट पढने के लिए सीधे हमारे पेज Chirkut बाबा के Crazy वचन पर आमंत्रित हैं लिंक-> https://facebook.com/ChirkutBaba

हनुमान जयंती का विशेष टोटका : ================== बजरंगबली चमत्कारिक सफलता देने वाले देवता माने गए हैं। हनुमान जयंती पर उनका यह टोटका ‍विशेष रूप से धन प्राप्ति के लिए किया जात‍ा है। साथ ही यह टोटका हर प्रकार का अनिष्ट भी दूर करता है। टोटका 1. - कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। संकट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा। टोटका 2. - अगर धन लाभ की स्थितियां बन रही हो, किन्तु ‍फिर भी लाभ नहीं मिल रहा हो, तो हनुमान जयंती पर गोपी चंदन की नौ डलियां लेकर केले के वृक्ष पर टांग देनी चाहिए। स्मरण रहे यह चंदन पीले धागे से ही बांधना है। टोटका 3. - एक नारियल पर कामिया सिन्दूर, मौली, अक्षत अर्पित कर पूजन करें। फिर हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ा आएं। धन लाभ होगा। टोटका 4. - पीपल के वृक्ष की जड़ में तेल का दीपक जला दें। फिर वापस घर आ जाएं एवं पीछे मुड़कर न देखें। धन लाभ होगा।

रामनवमी के दिन क्या करें: 1. प्रभु से भक्ति करते हुए मांगे- नाथ एक वर मांगऊं राम कृपा करि देहु। जन्म-जन्म प्रभु पद कमल कबहुं घटै जनि नेहु।। हे प्रभु राम! मैं आपसे केवल एक ही वर मांगता हूं, इसे देने की कृपा करें। प्रभु आपके चरण कमलों में मेरा प्रेम जन्म-जन्मांतर में कभी न घटे।। 2. प्रभु से अनुपम प्रेम भक्ति मांगे- परमानंद कृपानयन मन परिपूरन काम। प्रेम भगति अनपायनी देहु हमहि श्रीराम।। हे प्रभु श्रीराम! आप हमें अपनी अत्यंत पावन और तीनों प्रकार के तापों अथवा जन्म-मरण के क्लेशों का नाश करने वाली अनुपम प्रेम भक्ति का वरदान दीजिए। 3. प्रभु से शरण में लेने की प्रार्थना कीजिए- प्रभु मेरे मन में आप निवास करें। आप मेरे आंतरिक मैल को स्वच्छ करके उसमें भक्ति का समावेश करें। हे दीनानाथ, मैं आपकी शरण में हूं। मुझ शरणागत की रक्षा करें। इस प्रकार निष्कपट भक्ति करने से प्रभु प्रसन्न होकर हर मनोरथ पूर्ण करेंगे। प्रभु की दया और रक्षा के भरोसे सच्चा मनुष्य संसार में सदा निर्भय और निर्लिप्त बना रहता है। प्रभु अपनी शरण में आए जीवों की रक्षा स्वयं करते हैं। प्रभु कहते है कि - मम पन सरणागत भयहारी।। अर्थात - शरणागत के भय को दूर करना मेरा प्रण है। वे फिर कहते हैं- जो सभ‍ीत आवा सरनाई। रखिहऊं ताहि प्राण की नाई।। अर्थात‍ जो भयभीत होकर मेरी शरण में आया है, तो मैं उसे प्राणों की तरह संभाल कर रखूंगा। रामनवमी पर यह दृढ़निश्चय करें कि अपने मन और मार्ग को श्रीराम की भक्ति में लगा देंगे।

गर्मी में पुदीना खाएंगे तो इन बीमारियों की छुट्टी हो जाएगी ------------- ______________________________________________________ गर्मी में पुदीना खाने का टेस्ट बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। बहुत ही कम लोग जानते हैं कि ये एक बहुत अच्छी औषधि भी है साथ ही इसका सबसे बड़ा गुण यह है कि पुदीने का पौधा कहीं भी किसी भी जमीन, यहां तक कि गमले में भी आसानी से उग जाता है। यह गर्मी झेलने की शक्ति रखता है। इसे किसी भी उर्वरक की आवश्यकता नहीं पडती है। थोड़ी सी मिट्टी और पानी इसके विकास के लिए पर्याप्त है। पुदीना को किसी भी समय उगाया जा सकता है। इसकी पत्तियों को ताजा तथा सुखाकर प्रयोग में लाया जा सकता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं पुदीने के कुछ लाजवाब गुण 1.मुंहासे दूर करता है 2.श्वांस संबंधी परेशानियों में रामबाण 3.कैंसर में भी है उपयोगी 4. मुंह की दुर्गंध मिटाता है 5. खांसी खत्म करता है 6. गर्मी दूर कर ठंडक पहुंचाता है 7.बुखार में राहत देता है - हरा पुदीना पीसकर उसमें नींबू के रस की दो-तीन बूँद डालकर चेहरे पर लेप करें। कुछ देर लगा रहने दें। बाद में चेहरा ठंडे पानी से धो डालें। - कुछ दिनों के प्रयोग से मुँहासे दूर हो जाएँगे तथा चेहरा निखर जाएगा। - हरे -पुदीने की 20-25 पत्तियां, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2-3 दाने इन सबको पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें। -इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है। - एक चम्मच पुदीने का रस, दो चम्मच सिरका और एक चम्मच गाजर का रस एकसाथ मिलाकर पीने से श्वास संबंधी विकार दूर होते हैं। - इतना ही नहीं अधिक गर्मी या उमस के मौसम में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और -आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है। - एक रिसर्च से पता चला है कि यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी में लाभकारी है । - इसलिए हमें अपने घर के बगीचे में पुदीने का पौधा जरूर लगाना चाहिए,पुदीने का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से ज्वर दूर हो जाता है। - पेट में अचानक दर्द उठता हो तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करे। - नकसीर आने पर प्याज और पुदीने का रस मिलाकर नाक में डाल देने से नकसीर के रोगियों को बहुत लाभ होता है। - सलाद में इसका उपयोग स्वास्थ्यवर्धक है। प्रतिदिन इसकी पत्ती चबाई जाए तो दुत क्षय, मसूडों से रक्त निकलना, पायरिया आदि रोग कम हो जाते हैं। यह एंटीसेप्टिक की तरह काम करता है और दांतों तथा मसूडों को जरूरी पोषक तत्व पहुंचाता है। एक गिलास पानी में पुदीने की चार पत्तियों को उबालें। ठंडा होने पर फ्रिज में रख दें। इस पानी से कुल्ला करने पर मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है। - एक टब में पानी भरकर उसमें कुछ बूंद पुदीने का तेल डालकर यदि उसमें पैर रखे जाएं तो थकान से राहत मिलती है और बिवाइयों के लिए बहुत लाभकारी है।पानी में नींबू का रस, पुदीना और काला नमक मिलाकर पीने से मलेरिया के बुखार में राहत मिलती है। इसके अलावा हकलाहट दूर करने के लिए पुदीने की पत्तियों में काली मिर्च पीस लें तथा सुबह शाम एक चम्मच सेवन करें।पुदीने की चाय में दो चुटकी नमक मिलाकर पीने से खांसी में लाभ मिलता है। हैजे में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। - हरे पुदीने की 20-25 पत्तियां, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2-3 दाने इन सबको पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें। इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है। इतना ही नहीं अधिक गर्मी या उमस के मौसम में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है। - पुदीने का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से ज्वर दूर हो जाता है तथा न्यूमोनिया से होने वाले विकार भी नष्ट हो जाते हैं। पेट में अचानक दर्द उठता हो तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें। नकसीर आने पर प्याज और पुदीने का रस मिलाकर नाक में डाल देने से नकसीर के रोगियों को बहुत लाभ होता है।

^ रस-प्रयोग:किस रोग में कौन सा रस लेंगे? भूख लगाने के हेतुः प्रातःकाल खाली पेट नींबू का पानी पियें। खाने से पहले अदरक का कचूमर सैंधव नमक के साथ लें। रक्तशुद्धिः नींबू, गाजर, गोभी, चुकन्दर, पालक, सेव, तुलसी, नीम और बेल के पत्तों का रस। दमाः लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर, मीठी द्राक्ष का रस, भाजी का सूप अथवा मूँग का सूप और बकरी का शुद्ध दूध लाभदायक है। घी, तेल, मक्खन वर्जित है। उच्च रक्तचापः गाजर, अंगूर, मोसम्मी और ज्वारों का रस। मानसिक तथा शारीरिक आराम आवश्यक है। निम्न रक्तचापः मीठे फलों का रस लें, किन्तु खट्टे फलों का उपयोग न करें। अंगूर और मोसम्मी का रस अथवा दूध भी लाभदायक है। पीलियाः अंगूर, सेव, रसभरी, मोसम्मी। अंगूर की अनुपलब्धि पर लाल मुनक्के तथा किसमिस का पानी। गन्ने को चूसकर उसका रस पियें। केले में 1.5 ग्राम चूना लगाकर कुछ समय रखकर फिर खायें। मुहाँसों के दागः गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस। संधिवातः लहसुन, अदरक, गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी, हरा धनिया, नारियल का पानी तथा सेव और गेहूँ के ज्वारे। एसीडिटीः गाजर, पालक, ककड़ी, तुलसी का रस, फलों का रस अधिक लें। अंगूर मोसम्मी तथा दूध भी लाभदायक है। कैंसरः गेहूँ के ज्वारे, गाजर और अंगूर का रस। सुन्दर बनने के लिएः सुबह-दोपहर नारियल का पानी या बबूल का रस लें। नारियल के पानी से चेहरा साफ करें। फोड़े-फुन्सियाँ- गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी का रस और नारियल का पानी। कोलाइटिसः गाजर, पालक और पाइनेपल का रस। 70 प्रतिशत गाजर के रस के साथ अन्य रस समप्राण। चुकन्दर, नारियल, ककड़ी, गोभी के रस का मिश्रण भी उपयोगी है। अल्सरः अंगूर, गाजर, गोभी का रस। केवल दुग्धाहार पर रहना आवश्यक है। सर्दी-कफः मूली, अदरक, लहसुन, तुलसी, गाजर का रस, मूँग अथवा भाजी का सूप। ब्रोन्काइटिसः पपीता, गाजर, अदरक, तुलसी, पाइनेपल का रस, मूँग का सूप। स्टार्चवाली खुराक वर्जित। दाँत निकलते बच्चे के लिएः पाइनेपल का रस थोड़ा नींबू डालकर रोज चार औंस(100-125 ग्राम)। रक्तवृद्धि के लिएः मोसम्मी, अंगूर, पालक, टमाटर, चुकन्दर, सेव, रसभरी का रस रात को। रात को भिगोया हुआ खजूर का पानी सुबह में। इलायची के साथ केले भी उपयोगी हैं। स्त्रियों को मासिक धर्म कष्टः अंगूर, पाइनेपल तथा रसभरी का रस। आँखों के तेज के लिएः गाजर का रस तथा हरे धनिया का रस श्रेष्ठ है। अनिद्राः अंगूर और सेव का रस। पीपरामूल शहद के साथ। वजन बढ़ाने के लिएः पालक, गाजर, चुकन्दर, नारियल और गोभी के रस का मिश्रण, दूध, दही, सूखा मेवा, अंगूर और सेवों का रस। डायबिटीजः गोभी, गाजर, नारियल, करेला और पालक का रस। पथरीः पत्तों वाली भाजी न लें। ककड़ी का रस श्रेष्ठ है। सेव अथवा गाजर या कद्दू का रस भी सहायक है। जौ एवं सहजने का सूप भी लाभदायक है। सिरदर्दः ककड़ी, चुकन्दर, गाजर, गोभी और नारियल के रस का मिश्रण। किडनी का दर्दः गाजर, पालक, ककड़ी, अदरक और नारियल का रस। फ्लूः अदरक, तुलसी, गाजर का रस। वजन घटाने के लिएः पाइनेपल, गोभी, तरबूज का रस, नींबू का रस। पायरियाः गेहूँ के ज्वारे, गाजर, नारियल, ककड़ी, पालक और सुआ की भाजी का रस। कच्चा अधिक खायें। बवासीरः मूली का रस, अदरक का रस घी डालकर। डिब्बेपैक फलों के रस से बचोः बंद डिब्बों का रस भूलकर भी उपयोग में न लें। उसमें बेन्जोइक एसिड होता है। यह एसिड तनिक भी कोमल चमड़ी का स्पर्श करे तो फफोले पड़ जाते हैं। और उसमें उपयोग में लाया जानेवाला सोडियम बेन्जोइक नामक रसायन यदि कुत्ता भी दो ग्राम के लगभग खा ले तो तत्काल मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। उपरोक्त रसायन फलों के रस, कन्फेक्शनरी, अमरूद, जेली, अचार आदि में प्रयुक्त होते हैं। उनका उपयोग मेहमानों के सत्कारार्थ या बच्चों को प्रसन्न करने के लिए कभी भूलकर भी न करें। 'फ्रेशफ्रूट' के लेबल में मिलती किसी भी बोतल या डिब्बे में ताजे फल अथवा उनका रस कभी नहीं होता। बाजार में बिकता ताजा 'ओरेन्ज' कभी भी संतरा-नारंगी का रस नहीं होता। उसमें चीनी, सैक्रीन और कृत्रिम रंग ही प्रयुक्त होते हैं जो आपके दाँतों और आँतड़ियों को हानि पहुँचा कर अंत में कैंसर को जन्म देते हैं। बंद डिब्बों में निहित फल या रस जो आप पीते हैं उन पर जो अत्याचार होते हैं वे जानने योग्य हैं। सर्वप्रथम तो बेचारे फल को उफनते गरम पानी में धोया जाता है। फिर पकाया जाता है। ऊपर का छिलका निकाल लिया जाता है। इसमें चाशनी डाली जाती है और रस ताजा रहे इसके लिए उसमें विविध रसायन (कैमीकल्स) डाले जाते हैं। उसमें कैल्शियम नाइट्रेट, एलम और मैग्नेशियम क्लोराइड उडेला जाता है जिसके कारण अँतड़ियों में छेद हो जाते हैं, किडनी को हानि पहुँचती है, मसूढ़े सूज जाते हैं। जो लोग पुलाव के लिए बाजार के बंद डिब्बों के मटर उपयोग में लेते हैं उन्हें हरे और ताजा रखने के लिए उनमें मैग्नेशियम क्लोराइड डाला जाता है। मक्की के दानों को ताजा रखने के लिए सल्फर डायोक्साइड नामक विषैला रसायन (कैमीकल) डाला जाता है। एरीथ्रोसिन नामक रसायन कोकटेल में प्रयुक्त होता है। टमाटर के रस में नाइट्रेटस डाला जाता है। शाकभाजी के डिब्बों को बंद करते समय शाकभाजी के फलों में जो नमक डाला जाता है वह साधारण नमक से 45 गुना अधिक हानिकारक होता है। इसलिए अपने और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और मेहमान-नवाजी के फैशन के लिए भी ऐसे बंद डिब्बों की शाकभाजी का उपयोग करके स्वास्थ्य को स्थायी जोखिम में न डालें।

भगवान विष्णु जी और माता लक्ष्मी जी की एक कहानी एक बार भगवान विष्णु जी शेषनाग पर बेठे बेठे बोर होगये, ओर उन्होने धरती पर घुमने का विचार मन मै किया, वेसे भी कई साल बीत गये थे धरती पर आये, ओर वह अपनी यात्रा की तेयारी मे लग गये, स्वामी को तेयार होता देख कर लक्ष्मी मां ने पुछा !!आज सुबह सुबह कहा जाने कि तेयारी हो रही है?? विष्णु जी ने कहा हे लक्ष्मी मै धरती लोक पर घुमने जा रहा हुं, तो कुछ सोच कर लक्ष्मी मां ने कहा ! हे देव क्या मै भी आप के साथ चल सकती हुं???? भगवान विष्णु ने दो पल सोचा फ़िर कहा एक शर्त पर, तुम मेरे साथ चल सकती हो तुम धरती पर पहुच कर उत्तर दिशा की ओर बिलकुल मत देखना, इस के साथ ही माता लक्ष्मी ने हां कह के अपनी मनवाली। ओर सुबह सुबह मां लक्ष्मी ओर भगवान विष्णु धरती पर पहुच गये, अभी सुर्य देवता निकल रहे थे, रात बरसात हो कर हटी थी, चारो ओर हरियाली ही हरियाली थी, उस समय चारो ओर बहुत शान्ति थी, ओर धरती बहुत ही सुन्दर दिख रही थी, ओर मां लक्ष्मी मन्त्र मुग्ध हो कर धरती को देख रही थी, ओर भुल गई कि पति को क्या वचन दे कर आई है?ओर चारो ओर देखती हुयी कब उत्तर दिशा की ओर देखने लगी पता ही नही चला। उत्तर दिशा मै मां लक्ष्मी को एक बहुत ही सुन्दर बगीचा नजर आया, ओर उस तरफ़ से भीनी भीनी खुशबु आ रही थी,ओर बहुत ही सुन्दर सुन्दर फ़ुल खिले थे,यह एक फ़ुलो का खेत था, ओर मां लक्ष्मी बिना सोचे समझे उस खेत मे गई ओर एक सुंदर सा फ़ुल तोड लाई, लेकिन यह क्या जब मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के पास वापिस आई तो भगवान विष्णु की आंखो मै आंसु थे, ओर भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को कहा कि कभी भी किसी से बिना पुछे उस का कुछ भी नही लेना चाहिये, ओर साथ ही अपना वचन भी याद दिलाया। मां लक्ष्मी को अपनी भुल का पता चला तो उन्होने भगवान विष्णु से इस भुल की माफ़ी मागी, तो भगवान विष्णु ने कहा कि जो तुम ने जो भुल की है उस की सजा तो तुम्हे जरुर मिलेगी?? जिस माली के खेत से तुम नए बिना पुछे फ़ुल तोडा है, यह एक प्रकार की चोरी है, इस लिये अब तुम तीन साल तक माली के घर नोकर बन कर रहॊ, उस के बाद मै तुम्हे बैकुण्ठ मे वपिस बुलाऊंगा, मां लक्ष्मी ने चुपचाप सर झुका कर हां कर दी( आज कल की लक्ष्मी थोडे थी? ओर मां लक्ष्मी एक गरीब ओरत का रुप धारण करके , उस खेत के मालिक के घर गई, घर क्या एक झोपडा था, ओर मालिक का नाम माधव था, माधब की बीबी, दो बेटे ओर तीन बेटिया थी , सभी उस छोटे से खेत मै काम करके किसी तरह से गुजारा करते थे, मां लक्ष्मी जब एक साधारण ओर गरीब ओरत बन कर जब माधव के झोपडे पर गई तो माधव ने पुछा बहिन तुम कोन हो?ओर इस समय तुम्हे क्या चाहिये? तब मां लक्ष्मी ने कहा ,मै एक गरीब ओरत हू मेरी देख भाल करने वाला कोई नही, मेने कई दिनो से खाना भी नही खाया मुझे कोई भी काम देदॊ, साथ मै मै तुम्हरे घर का काम भी कर दिया करुगी, बस मुझे अपने घर मै एक कोने मै आसरा देदो? माधाव बहुत ही अच्छे दिल का मालिक था, उसे दया आ गई, लेकिन उस ने कहा, बहिन मै तो बहुत ही गरीब हुं, मेरी कमाई से मेरे घर का खर्च मुस्किल से चलता है, लेकिन अगर मेरी तीन की जगह चार बेटिया होती तो भी मेने गुजारा करना था, अगर तुम मेरी बेटी बन कर जेसा रुखा सुखा हम खाते है उस मै खुश रह सकती हो तो बेटी अन्दर आ जाओ। माधाव ने मां लक्ष्मी को अपने झोपडे मए शरण देदी, ओर मां लक्ष्मी तीन साल उस माधव के घर पर नोकरानी बन कर रही; जिस दिन मां लक्ष्मी माधव के घर आई थी उस से दुसरे दिन ही माधाव को इतनी आमदनी हुयी फ़ुलो से की शाम को एक गाय खरीद ली,फ़िर धीरे धीरे माधव ने काफ़ी जमीन खारीद ली, ओर सब ने अच्छे अच्छे कपडे भी बनबा लिये, ओर फ़िर एक बडा पक्का घर भी बनबा लिया, बेटियो ओर बीबी ने गहने भी बनबा लिये, ओर अब मकान भी बहुत बडा बनाबा लिया था। माधव हमेशा सोचता था कि मुझे यह सब इस महिला के आने के बाद मिला है, इस बेटी के रुप मे मेरी किस्मत आ गई है मेरी, ओर अब २-५ साल बीत गये थे, लेकिन मां लक्ष्मी अब भी घर मै ओर खेत मै काम करती थी, एक दिन माधव जब अपने खेतो से काम खत्म करके घर आया तो उस ने अपने घर के सामने दुवार पर एक देवी स्वरुप गहनो से लदी एक ओरात को देखा, ध्यान से देख कर पहचान गया अरे यह तो मेरी मुहं बोली चोथी बेटी यानि वही ओरत है, ओर पहचान गया कि यह तो मां लक्ष्मी है. अब तक माधव का पुरा परिवार बाहर आ गया था, ओर सब हेरान हो कर मां लक्ष्मी को देख रहै थे,माधव बोला है मां हमे माफ़ कर हम ने तेरे से अंजाने मै ही घर ओर खेत मे काम करवाया, है मां यह केसा अपराध होगया, है मां हम सब को माफ़ कर दे अब मां लक्ष्मी मुस्कुराई ओर बोली है माधव तुम बहुत ही अच्छे ओर दयालु व्यक्त्ति हो, तुम ने मुझे अपनी बेती की तरह से रखा, अपने परिवार के सदस्या की तरह से, इस के बदले मै तुम्हे वरदान देती हुं कि तुम्हारे पास कभी भी खुशियो की ओर धन की कमी नही रहै गी, तुम्हे सारे सुख मिलेगे जिस के तुम हक दार हो, ओर फ़िर मां अपने स्वामी के दुवारा भेजे रथ मे बेठ कर बेकुण्ठ चली गई इस कहानी मै मां लक्ष्मी का संदेशा है कि जो लोग दयालु ओर साफ़ दिल के होते है मै वही निवास करती हुं, हमे सभी मानवओ की मदद करनी चाहिये, ओर गरीब से गरीब को भी तुच्छ नही समझना चाहिये। शिक्षा..... इस कहानी मै लेखक यहि कहना चाहता है कि एक छोटी सी भुल पर भगवान ने मां लक्ष्मी को सजा देदी हम तो बहुत ही तुच्छ है, फ़िर भी भगवान हमे अपनी कृपा मे रखता है, हमे भी हर इन्सान के प्र्ति दयालुता दिखानि ओर बरतनि चाहिये, ओर यह दुख सुख हमारे ही कर्मो का फ़ल है | साभार : Arun Pandey

बनता काम बिगडता हो, लाभ न हो रहा हो या कोई भी परेशानी हो तो : 1. हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में बदाना (मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंदिर के बाहर गरीबों में बांट दें ! 2. व्यापार, विवाह या किसी भी कार्य के करने में बार-बार असफलता मिल रही हो तो यह टोटका करें- सरसों के तैल में सिके गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूये, सात मदार (आक) के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तैल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरण्डी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात्रि में किसी चौराहे पर रखें और कहें -“हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूँ कृपा करके मेरा पीछा ना करना। सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।