Neeraj Pareek

28 Flips | 6 Magazines | 6 Followers | @neerajpareek33 | Keep up with Neeraj Pareek on Flipboard, a place to see the stories, photos, and updates that matter to you. Flipboard creates a personalized magazine full of everything, from world news to life’s great moments. Download Flipboard for free and search for “Neeraj Pareek”

Log In or Sign Up to View

This Facebook post is no longer available. It may have been removed or the privacy settings of the post may have changed.

Like jarur karo join-एक नया भारत बनाने का इरादा मन मेँ है

लो कर लो बात

कहाँ है वो 65 कुत्ते एम पी जिनहोने ओबामा को को मोदी के बार मे पत्र लिखा था जारी है हिन्दुओ कर नरसंहार किश्तवाड़ में, उन्हें बचाने वाला कोई नहीं! किश्तवाड़ में हिन्दू लडकियों और महिलाओ के बलात्कार करने के बाद उनको जलाया जा रहा है। काँग्रेस ओर नेशनल कोन्फ्रेंस मिल कर हिन्दुओ का नरसंहार करवा रही है और वह पर किसी भी मीडिया को नहीं जाने दिया जा रहा

The expert in anything was once a beginner. Don’t give up no matter how many times you fail. Don't let life discourage you; everyone who got where he is had to begin where he was... Dr Monika (Spiritual Motivational Speaker)

लौह स्तंभ दिल्ली में क़ुतुब मीनार के निकट स्थित एक विशाल स्तम्भ है। यह अपनेआप में प्राचीन भारतीय धातुकर्म की पराकाष्ठा है। यह कथित रूप से राजा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य (राज ३७५ - ४१३) से निर्माण कराया गया इसके ऊपर गरुड़ की मूर्ति पहले कभी होगी। स्तंभ का कुल वजन ६०९६ कि.ग्रा. है। १९६१ में इसके रासायनिक परीक्षण से पता लगा कि यह स्तंभ आश्चर्यजनक रूप से शुद्ध इस्पात का बना है तथा आज के इस्पात की तुलना में इसमें कार्बन की मात्रा काफी कम है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मुख्य रसायन शास्त्री डा. बी.बी. लाल इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि इस स्तंभ का निर्माण गर्म लोहे के २०-३० किलो को टुकड़ों को जोड़ने से हुआ है।

सुरक्षित, शत्रु विहीन और निर्भय रहना ही शांतिपूर्ण है। # -आचार्य चाणक्य

पूरी पोस्ट नही पड़ सकते तो यहाँ Click करें : http://www.youtube.com/watch?v=0fo5tDYfMi8 हिंदुस्तान की न्याय व्यवस्था में काम करने वाले जो एडवोकेट्स मित्र है उनसे माफ़ी मांगते हुए आप सबसे ये पूछता हूँ के क्या आप जानते है यह काला कोट पेहेनके अदालत में क्यों जाते है ? क्या काले को छोड़ के दूसरा रंग नही है भारत में ? सफ़ेद नही है नीला नही है पिला नही है हरा नही है ?? और कोई रंग ही नही है कला ही कोट पहनना है । वो भी उस देश की न्यायपालिका में जहाँ तापमान 45 डिग्री हो। तो 45 तापमान जिस देशमे रहता हो उहाँ के वोकिल काला कोट पेहेनके बहेस करे, तो बहस के समय जो पसीना आता है वो और गर्मी के कारन जो पसीना आता है वो, तरबतर होते जाये और उनके कोट पर पसीने से सफ़ेद सफ़ेद दाग पड़ जाये पीछे कोलार पर और कोट को उतारते ही इतनी बदबू आये की कोई तिन मीटर दूर खिसक जाये लेकिन फिर भी कोट का रंग नही बदलेंगे। क्योंकि ये अंग्रेजो का दिया हुआ है। आपको मलिम है अंग्रेजो की अदालत में काला कोट पहनके न्यायपालिका के लोग बैठा करते थे। और उनके यहाँ स्वाभाविक है क्योंकि उनके यहाँ नुन्यतम -40 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान होता है जो भयंकर ठण्ड है । तो इतनी ठण्ड वाली देश में काला कोट ही पेहेनना पड़ेगा कियोंकि वो गर्मी देता है। ऊष्मा का अच्छा अवशोषक है। अन्दर की गर्मी को बाहर नही निकलने देता और बाहर से गर्मी को खिंच के अन्दर डालता है । इसीलिए ठण्ड वाले देश के लोग काला कोट पेहेनके अदालत में बहस करे तो समझ में आता है पर हिंदुस्तान के गरम देश के लोग काला कोट पेहेनके बहस करे !!!!!! 1947 के पहले होता था समझमे आता है पर 1947 के बाद भी चल रहा है ??? हमारी बार काउन्सिल कोइत्नि समझ नही है क्या? के इस छोटी सी बात को ठीक कर ले बदल ले । सुप्रीम कोर्ट की बार काउन्सिल है हाई कोर्ट की बार काउन्सिल है डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की बार काउन्सिल है सभी बार काउन्सिल मिलके एक मिनट में फैसला कर सकते है की काल से हम ये काला कोर्ट नही पहनेंगे। वो तो भला हो हिंदुस्तान में कुछ लोगों का हमारे देश पहले अंग्रेज न्यायाधीश हुआ करते थे तो सर पे टोपा पेहेनके बैठते थे, उसमे नकली बाल होते थे। आज़ादी के बाद 40 -५० साल तक टोपा लगा कर यहाँ बहुतसारे जज बैठते रहे है इस देश की अदालत में। अभी यहाँ क्या विचित्रता है के काला कोट पेहेन लिया ऊपर से काला पंट पेहेन लिया, बो लगा लिया सब एकदम टाइट कर दिया हवा अन्दर बिलकुल न जाये फिर मांग करते है के सभी कोट में एयर कंडीशनर होना चाहिए!! ये कोट उतर के फेंक दो न एयर कंडीशन की जरुरत क्या है ? और उसके ऊपर एक गाउन और लाद लेते है वो निचे तक लहंगा फैलता हुआ। ऐसी विचित्रताए इस देश में आज़ादी के ६० साल बाद भी दिखाई दे रहा है। अंग्रेजो की गुलामी की एक भी निशानी को आज़ादी के 65 साल में हमने मिटाया नही, सबको संभाल के रखा है।

ये है देश के विनाश के आंकड़े ! जिसे सरकार विकास बताती है ! 65 साल से रुपए का गिरता मूल्य ! � 1947 में 1 डालर = 1.00 रूपये 1966 में 1 डालर = 7.50 रूपये 1975 में 1 डालर = 8.40 रूपये 1984 में 1 डालर = 12.36 रूपये 1990 में 1 डालर = 17.50 रूपये 1991 में 1 डालर = 24.58 रूपये 1992 में 1 डालर = 28.97 रूपये 1995 में 1 डालर = 34.96 रूपये 2000 में 1 डालर = 46.78 रूपये 2001 में 1 डालर = 47.93 रूपये 2002 में 1 डालर = 48.98 रूपये 2003 में 1 डालर = 45.57 रूपये 2004 में 1 डालर = 43.84 रूपये 2005 में 1 डालर = 46.11 रूपये 2007 में 1 डालर = 44.25 रूपये 2008 में 1 डालर = 49.82 रूपये 2009 में 1 डालर = 46.29 रूपये 2010 में 1 डालर = 45.09 रूपये 2011 में 1 डालर = 51.10 रूपये 2012 में 1 डालर = 54.47 रूपये 2013 में 1 डालर = 60.50 रूपये रुपए की कीमत गिरने से नुकसान कितना होता जानने के लिए यहाँ देखे !! http://www.youtube.com/watch?v=D8cBH93pQlw ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::

प्रभु चावला – लोग अमेरिका में भी बुला रहे हैं आपको लेकिन वहाँ कि सरकार VISA नहीं देती आपको नरेंद्र मोदी – पहली बात तो ये है कि एक Factual जानकारी आपकी गलत है ,जरा एक बार अमरीका से पूछिए कि क्या मोदी ने उससे VISA माँगा है प्रभु चावला – आपने नहीं माँगा ?? नरेंद्र मोदी – मैंने बिलकुल नहीं माँगा प्रभु चावला – आप आगे मांगेंगे भी नहीं ?? नरेंद्र मोदी – मैंने साफ कहा है कि मैं ऐसा हिंदुस्तान देखना चाहता हूँ कि अमेरिका के लोग हिंदुस्तान का VISA पाने के लिए लाइन लगाकर खड़े हों , ये सपना होना चाहिए हमारा ,किसी के आगे गिडगिडाने वाला सपना नहीं होना चाहिए और इसलिए मैं नहीं जानता कि आप लोग क्यों रोते रहते हो दिन-रात इसे लेकर प्रभु चावला – नरेंद्र मोदी का भविष्य क्या है ?? नरेंद्र मोदी – मैं मोदी के भविष्य के लिए जिंदगी नहीं खपाता हूँ... विडियो लिंक http://www.youtube.com/watch?v=-IyWalGhtI8 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::;;

मंजिल मिल ही जायेगी भटकते ही सही, गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं

देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के साथ क्या किया जाये ? जवाब दीजिए..एवं अपने मित्रों को भी जवाब देने के लिए बोलिए!!

हम फौजी इस देश की धड़कन है #शुभम

14 आँगस्ट 1947 - एक काला दिन। काँग्रेस-मुस्लिम लीग ने अखंड भारत का बटवारा किया। दंगो मे 10 लाख से ज्यादा हिन्दू सीखो को मौत के घाट उतार दिया गया। पाकीस्तान ने लाशो से भरी ट्रेने भेजी। लाशो से भरी ट्रेन पर लिखा था "नेहरु को आजादी का तोहफा". देश का दुर्भाग्य है की आज भी यह खुनी पार्टी देश पर शाशन कर रही है। Rajiv Dixit

भारतीय संविधान की धारा ३७० (Article 370) जम्मू एवं कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करता है। यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है। भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की मांग करते रहे हैं। धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार- १. भारत की संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित क़ानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए। २. जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती। ३. राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बरख़ास्त करने का अधिकार नहीं है। ४. 1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता। ५. इसके तहत भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते हैं। ६. भारतीय संविधान की धारा 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती। ७. भारतीय संविधान की पाँचवी अनुसूची (अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जन-जातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित) और छठी अनुसूची (जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के विषय मे) जम्मू कश्मीर मे लागु नही होती | ८. जम्मू कश्मीर के हाई कोर्ट को बहुत सीमित शक्तियां प्राप्त वे जम्मू कश्मीर के कोई भी कानून को असम्बैधानिक घोषित नही कर सकती न हि कोई रिट इशू कर सकती है | ९. भारतीय संविधान की भाग 4 जिसमे राज्यों के नीति निर्देशक तत्व है और भाग 4A जिसमे नागरिकों के मूल कर्तव्य बताये गए है वो जम्मू कश्मीर मे लागु नही होता | १०. जम्मू कश्मीर का अपना अलग संबिधान है | ११. जम्मू कश्मीर की विधानसभा की अनुमति के बिना राज्य के सीमा को परिवर्तित करने वाला कोई भी विधेयक भारत की संसद मे पेश नही किया जा सकता | १२. पाकिस्तान चले गए लोगों के नागरिकता के इनकार के बारे में भारतीय संविधान के प्रावधान जम्मू कश्मीर के स्थायी निवासियों के लिए लागू नहीं होते जो पहले पाकिस्तान चले गए थे | १३. जम्मू कश्मीर का अपना अलग झंडा है | #मोदी_वेर्सेस_खांग्रेस्स_नही_अब_ये_ॐ_वेर्सेस_रोम_की_लड़ाई_है लाइक करें - "अगर आप सच्चे हिंदुस्तानी हो"

Swami Ramdev

Swami Ramdev

Swami Ramdev