apoorv jain

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Vibhishana Meets Rama

मेरे राम भक्त हनुमन्ता, कर दो बेड़ा पार ।

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श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥ बुध्दिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ चौपाई जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपिस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै कांधे मूँज जनेऊ साजै॥ संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लषन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥ जुग सहस्त्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥ भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ संकट तें हनुमान छुडावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोइ लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेंइ सर्ब सुख करई॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरु देव की नाईं॥ जो सत बर पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

Jai Bajrangbali..Tod De Dushman Ki Nali Tera Nam Liya Bala Tali Jai Bajrangbali

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A beautiful statue of Lord Hanuman at an ISKCON temple.

कोइ कहता मंगल, शनिवार तुम्हारा है मै तो कहता हर पल, हर वार तुम्हारा है जय राम सियाराम, जय राम सियाराम

शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महांजगबंदन ...

Today on the starting of Paryushana,the biggest festival of Jains,wishing you strength,peace and happiness and prayers for the fulfillment of your purposes...May God purify our souls and forgive us for our mistakes...

प्रातः सायं नित्य प्रति प्रभु होती जहां तुम्हारी पूजा . बिना मनाये तुमको हनुमत होता कोई काम न दूजा

सोमबार से रविबार ...... उत्तर भारत में लोग मंगलबार को हनुमान जी का दिन मानते हे ........हमारे गुजरात में शनिवार को... लेकिन क्या ये दो बार ही उनके हे...?......बिलकुल नहीं.....वैसे तो सब बार उनके हे ....और कहा जाये तो इनमे से एक भी नहीं... सब बार उनके केसे ?...तो सुनिए... सोमबार : हनुमान जी निरंतर " राम नाम " का जप करते हे ..और राम नाम को सोम रस कहा गया हे....तो सोमबार उनका हुआ.. मंगलबार : ये मंगल मूर्ति हे ..सो मंगल भी उनका.. बुधबार : बुद्धिम्तावरिश्थं हे ..तो बुध भी उनका.. गुरुबार: जय जय जय हनुमान गोसाई |कृपा करो गुरु देव की नाई ||..........वो गुरु स्वरूप हे..तो गुरु भी उनका .. शुक्रबार: " अतुलित्बल्धाम्म " उनके जितना तेजस्वी ...शुक्र्वान कोई नहीं ..तो शुक्र भी उनका हुआ... शनिबार : शनिबार को तो उनका हे ही... रविबार : " बाल समय रवि भक्ष लियो .." ......तो रवि भी उनका हुआ .. तो आखिर में सब बार उनके हुए .....और वेसे एक भी बार उनका नहीं ..........वो केसे हनुमान का एक ही बार हे और वो हे " " एतबार "" ......एतबार यानि भरोसा ...विश्वास.....प्रेम " जहा कही भी सच्चा विश्वास ..प्रेम होगा ..वहा हनुमानजी होगे ही ..."

श्री हनुमान जी की चाँदी की भव्य प्रतिमा श्री हनुमान बालाजी मंदिर विवेक विहार, दिल्ली में शुद्ध 40 किलो चाँदी की श्री हनुमान जी की पूर्ण कद की प्रतिमा है जिसका अभिषेक नियमित रूप से किया जाता है। यह मूर्ति विश्व में अद्वितीय है। इतनी बड़ी और इस रूप की अन्य मूर्ति कहीं पर नहीं है।

Sri Neelaanjan, Samabhaasam, Raviputram, Yamaagrajam! Chhaya martand, Sambhutam, Tam namami shaneshcharam! Jai Shani Jai Jai Shani

दुनियाँ चले ना श्रीराम के बिना, रामजी चले ना हनुमान के बिना .....

हर भक्ति की भक्ति के प्राण हो तुम हर वीर की शक्ति की शान हो तुम तुम ब्रह्माण्ड में एक हो हनुमंता

महा मृत्युंजय मंत्र का अक्षरशः अर्थ त्रयंबकम = त्रि-नेत्रों वाला (कर्मकारक) यजामहे = हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं, हमारे श्रद्देय सुगंधिम= मीठी महक वाला, सुगंधित (कर्मकारक) पुष्टि= एक सुपोषित स्थिति,फलने-फूलने वाली, समृद्ध जीवन की परिपूर्णता वर्धनम = वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है, (स्वास्थ्य, धन, सुख में) वृद्धिकारक; जो हर्षित करता है, आनन्दित करता है, और स्वास्थ्य प्रदान करता है, एक अच्छा माली उर्वारुकम= ककड़ी (कर्मकारक) इव= जैसे, इस तरह बंधना= तना (लौकी का); ("तने से" पंचम विभक्ति - वास्तव में समाप्ति - द से अधिक लंबी है जो संधि के माध्यम से न/अनुस्वार में परिवर्तित होती है) मृत्युर =मृत्यु से मुक्षिया = हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें मा= न अमृतात= अमरता, मोक्ष

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा|| हृदय राखि कौशलपुर राजा || मंगल मंगल मंगल मंगल मंगल मंगल हो...

जय हो जय तो तुम्हारी जी बजरंगबली, ले के शिव रूप आना गज़ब हो गया । त्रेता युग में थे तुम आये, द्वार में भी, तेरा कलयुग में आना गज़ब हो गया ॥ बचपन की कहानी निराली बड़ी, जब लगी भूख बजरंग मचलने लगे । फल समझ कर उड़े आप आकाश में, तेरा सूरज को खाना गज़ब हो गया ॥ कूदे लंका में जब मच गयी खलबली, मारे चुन चुन के असुरों को बजरंगबली । मार डाले अक्षे को पटक के वोही, तेरा लंका जलाना गज़ब हो गया ॥ आके शक्ति लगी जो लखन लाल को, राम जी देख रोये लखन लाल को । लेके संजीवन बूटी पवन वेग से, पूरा पर्वत उठाना गज़ब हो गया ॥ जब विभिक्षण संग बैठे थे श्री रामजी, और चरणों में हाजिर थे हनुमान जी । सुन के ताना विभिक्षण का अनजानी के लाल, फाड़ सीना दिखाना गज़ब हो गया ॥

108 Names of Lord Hanuman Ji The following are very virtuous and poised one hundred and eight names of Hanuman which specify his great merits. 1. OM Hanumatay Namaha 2. OM Shree Pradaayay Namah 3. OM Vaaya Putraaya Namaha 4. OM Rudraayay Namaha 5. OM Ana-Gaayay Namaha 6. OM Aja-Raayay Namaha 7. OM Amrit-Yavay Namaha 8. OM Maarutaat-Majaayay Namaha 9. OM Vira-Viraayay Namaha 10. OM Grama-VaaSaayay Namaha 11. OM Janash-Radaayay Namaha 12. OM Dhana-Daayay Namaha 13. OM Akaa-YaaYay Namaha 14. OM Virayay Namaha 15. OM Nidhi-Patayay Namaha 16. OM Munayay Namaha 17. OM Vaag-Minay Namaha 18. OM Pingaak-Shaayay Namaha 19. OM Vara-Daayay Namaha 20. OM Sita Shoka-Vinaasha-Naayay Namaha 21. OM Rakta Vaasasay Namaha 22. OM Shivaayay Namaha 23. OM Shar-Vaayay Namaha 24. OM Paraayay Namaha 25. OM Avyak-Taayay Namaha 26. OM Vyakta-Avyak-Tayay Namaha 27. OM Rasaa-DhaRaayay Namaha 28. OM Ping-Keshaayay Namaha 29. OM Pinga-ROmanay Namaha 30. OM Shruti-Gamyaayay Namaha 31. OM Sana-Tanaaya Namaha 32. OM Anaa-Daayay Namaha 33. OM Bhagawatay Namaha 34. OM Devaayay Namaha 35. OM Vishwa-Haytavay Namaha 36. OM Niraa-Shra-yaayay Namaha 37. OM Aarogya-Kartray Namaha 38. OM Vish-Vesh-aayay Namaha 39. OM Vishva-Naayak-aayay Namaha 40. OM Harish-Waraayay Namaha 41. OM Bhar-Gaayay Namaha 42. OM Ram-Aayay Namaha 43. OM Rav-Vayay Namaha 44. OM Visva Haraaya Namaha 45. OM Vish-Vaaya Namaha 46. OM Vishva Sevayaay Namaha 47. OM Vishva-Aatmanaay Namaha 48. OM Visha-Daayay Namaha 49. OM Vishva-Kaar-aayay Namaha 50. OM Raam-Bhaktaayay Namaha 51. OM Vishva-Murtaaya Namaha 52. OM Vishvam Bharaayay Namaha 53. OM Prakriti-Sthiraaya Namaha 54. OM Kalyaa-Naayay Namaha 55. OM Vishva-Chesha-Laayay Namaha 56 OM Avaya-Graayay Namaha 57. OM Anjani-Sunavay Namaha 58. OM Ajaayay Namaha 59. OM Sakhyay Namaha 60. OM Tatvagam-Yaayay Namaha 61. OM Vanay-Charaayay Namaha 62. OM Yunay Namaha 63. OM Vrid-Dhyayay Namaha 64. OM Baalaayay NamahaBaa 65. OM Tatvaayay Namaha 66. OM Jyesh-Taayay Namaha 67. OM Vidyaayay Namaha 68. OM Kapish-Shestray Namaha 69. OM Plavang-Gamayay Namaha 70. OM Kalaa-Dharaayay Namaha 71. OM Vishvaa-Dhyayaayay Namaha 72. OM Vishvaa-Gamyaayay Namaha 73. OM Graama Swantaayay Namaha 74. OM Ama-Laayay Namaha 75. OM Vyaapa-Kaayay Namaha 76. OM Praana-Vaayay Namaha 77. OM Omkar-Jamyaayay Namaha 78. OM Satyaayay Namaha 79. OM Avyaaya Namaha 80. OM Tapa-say Namaha 81. OM Jana Lokaayay Namaha 82. OM Mahaa Lokaayay Namaha 83. OM Swar-Lokaayay Namaha 84. OM Bhuvar-Lokaayay Namaha 85. OM Bhur-Lokaayay Namaha 86. OM Dharaa-Dharaayay Namaha 87. OM ShivaDharam, Pratish-taatray Namaha 88. OM Satyaayay Namaha 89. OM Purnaayay Namaha 90. OM Raksha-Praana, Haarakaayay Namaha 91. OM Jaanaki-Praandaatray Namaha 92. OM Sharanaagata-Vatsalaayay Namaha 93. OM Pandari-Kaakshaayaya Namaha 94. OM Raaksho-Dhanaayay Namaha 95. OM Dharaa-Dhipaayay Namaha 96. OM Purna Kamaayay Namaha 97. OM Gospadi-krita, Vaarish-aayay Namaha 98. OM Phaalgun-Priyaayay Namaha 99. OM Ramesh-Taatray Namaha 100. OM Rudra-Kar-Maayay Namo Namaha 101. OM Devay-So Namaha 102. OM Krish-Naayay Namaha 103. OM Raamdoo-Taayay Namaha 104. OM Shakti Raakshasaa, Maara-kaayay Namaha 105. OM Shakti Naytaayay Namaha 106. OM Drona Hartray Namaha 107. OM Divaakara, Sama-Prabhaayay Namaha 108. OM Pita-Vaasasay Namaha

जय सियाराम पुष्प वाटिका में श्री राम और जानकी का नेत्र मिलन हुआ । जानकी जी ने श्री राम को अपने हृदय कमल में बसाकर माता गिरिजा की वन्दना की । जय जय गिरिबरराज किसोरी । जय महेस मुख चंद चकोरी ॥ जय गज बदन षडानन माता । जगत जननि दामिनि दुति गाता ॥ नहिं तव आदि मध्य अवसाना । अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना ॥ भव भव बिभव पराभव कारिनि । बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि ॥ सेवत तोहि सुलभ फल चारी । बरदायनी पुरारि पिआरी ॥ देबि पूजि पद कमल तुम्हारे । सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे ॥

नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्, रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा, भाषानिबन्धमतिमंजुलमातनोति॥ (७) भावार्थ:- अनेक पुराण, वेद और (तंत्र) शास्त्र से सम्मत तथा जो रामायण में वर्णित है और कुछ अन्यत्र से भी उपलब्ध श्री रघुनाथजी की कथा का मैं तुलसीदास अपने अन्तःकरण के सुख के लिए अत्यन्त मनोहर भाषा में रचना का विस्तार करता हूँ।

मोरे मन अस द्रढ़ विस्वासा ,राम से बड़े राम कर दासा। जय सियाराम

Tum naa sunoge to kaun sune HANUMAN

Hanuman ji at Gondal, Gujarat

Thoda-Thoda Kaam Shri Rama Ji Karenge Thoda-Thoda Kaam Hanuman Ji Karenge

सरहद के पार श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर.. कराची (पाकिस्तान )

ऋषिकेश l गंगा के किनारे मायाकुंड में हनुमान का सिद्ध मंदिर स्थित है l