Ashutosh Agarwal

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दीवाली पूजन में कुबेर पूजा क्यों?

<b>नवनिधियों के स्वामी कुबेर</b><p>राजाधिराज कुबेर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की धन-सम्पदा के स्वामी होने के साथ देवताओं के भी धनाध्यक्ष (treasurer) हैं। संसार के …

मन के विकार ही बन जाते हैं रोग

<b>’जगत को किसने जीता? जिसने मन को जीता। मन को जीत कर ही संसार पर विजय प्राप्त की जा सकती है; क्योंकि मन ही बन्धन और मोक्ष का हेतु हैं।’</b></b> …

हजार नामों के समान फल देने वाले भगवान सूर्य के 21 नाम

भगवान सूर्य का अवतरण संसार के कल्याण के लिए हुआ है इसलिए पंचदेवोपासना में उनका विशिष्ट स्थान है। शास्त्र कहते हैं कि <b>‘आरोग्यं भास्करादिच्छेत्’</b> अर्थात् …

कैसे करें नवरात्रि में कलश की स्थापना ? Kalash Sthapana Vidhi

<b>कलशस्य मुखे विष्णु: कण्ठे रुद्र: समाश्रित:।</b> <b><br>मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणा: स्मृता:।।</b><p>अर्थात्–कलश के मुख में विष्णुजी, कण्ठ में रुद्र, मूल …

हवन में आहुति देते समय क्यों कहते हैं स्वाहा ?

<b>अग्निदेव की दाहिकाशक्ति है ‘स्वाहा’</b><p>अग्निदेव में जो जलाने की तेजरूपा (दाहिका) शक्ति है, वह देवी स्वाहा का सूक्ष्मरूप है। हवन में आहुति में दिए गए …

क्यों है नर्मदा नदी का हर पत्थर शिवलिंग?

<b>अत्यन्त पवित्र और परमात्स्वरूप नर्मदेश्वर शिवलिंग</b><p><b>नर्मदा नदी से निकलने वाले शिवलिंग को ‘नर्मदेश्वर’ कहते हैं। यह घर में भी स्थापित किए जाने वाला</b> …

शनि की पीड़ा से मुक्ति का सबसे प्रभावशाली उपाय

<b>इन्द्रनीलद्युति: शूली वरदो गृध्रवाहन:।</b> <b><br>बाणबाणासनधर: कर्तव्योऽर्कसुतस्तथा।।</b><p>अर्थात्–सूर्यपुत्र शनिदेव के शरीर की कान्ति इन्द्रनीलमणि की-सी है। वे गीध पर …

श्रीराधा के चरणचिह्न और उनका भाव

<b>श्रीराधा के चरणकमल हैं समस्त सुखों की खान</b><p>मधुराभक्ति की सजीव प्रतिमा श्रीराधा के चरणकमल की सेवा ही वैष्णवों का जीवन है। श्रीराधा और उनके चरणकमलों की …

रोग व अकालमृत्यु-भय को मिटाने वाला महामृत्युंजय-मन्त्र

शास्त्रों में मानव शरीर को <b>‘व्याधिमन्दिरम्’</b> कहा गया है। कई बार कर्मभोग के कारण जब कोई जटिल रोग अनेक चिकित्सा उपायों को करने पर भी ठीक नहीं हो पाता तो …

श्रीकृष्ण की व्रज में आनन्द बांटने की बाललीला

कृष्णावतार आनन्द अवतार है। भगवान श्रीकृष्ण व्रज के सुख <b>की टोकरी सिर पर लेकर ढोते हैं और व्रज की गलियों में कहते फिरते हैं–आनंद लो आनंद।</b><p>एक दिन नंद के …

श्रावणमास में शिवपूजा संवारती है जीवन

<b>दिगम्बर हैं स्वयं दीनों को पीताम्बर दिया करते।</b> <b><br>औघड़दानी होके घर औरों का धन से भर दिया करते।।</b> <b><br>यहां दुर्भाग्य भी सौभाग्य के ढांचे में ढल जाये।</b> <b><br>चरण पर भाल</b> …

भगवान शंकर का सिद्ध स्तोत्र शिव महिम्न:-स्तोत्र

<b>‘महेश से बढ़कर कोई देवता नहीं, शिव महिम्न:-स्तोत्र से बढ़कर कोई स्तोत्र नहीं है। अघोरमन्त्र से बढ़कर कोई मन्त्र नहीं है, गुरु से बढ़कर कोई तत्त्व</b> …

सुख और सौभाग्य देती है शिवप्रिया पार्वती की पूजा

<b>गौरी मे प्रीयतां नित्यं अघनाशाय मंगला।</b> <b><br>सौभाग्यायास्तु ललिता भवानी सर्वसिद्धये।। (उत्तरपर्व २७।१९)</b><p>अर्थ–<b>‘गौरी नित्य मुझ पर प्रसन्न रहें, मंगला मेरे</b> …

पान से आ सकती है दरिद्रता

चौंक गये ना आप! भला, पान और दरिद्रता में क्या सम्बन्ध है? सम्बन्ध है, गलत समय पर और गलत तरीके से पान खाने से, और पान में तम्बाकू (सूर्ती) डालकर खाने …

मन को शान्ति देने वाला है श्रीकृष्ण नाम

<b>कृष्ण नाम के दो अक्षर में क्या जानें क्या बल है!</b> <b><br>नामोच्चारण से ही मन का धुल जाता सब मल है।।</b> <b><br>गद्गद् होता कण्ठ, नयन से स्त्रावित होता जल है।</b> <b><br>पुलकित होता</b> …

घर में स्थापित किए जाने वाला अत्यन्त शुभ नर्मदेश्वर शिवलिंग

<b>देवमुनिप्रवरार्चितलिंगं कामदहं करुणाकरलिंगम्।</b> <b><br>रावणदर्पविनाशनलिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम्।। (लिंगाष्टक २)</b><p>अर्थात्–जो शिवलिंग देवगण व मुनियों द्वारा …

भगवान विष्णु के तीन नाम, करते हैं रोगों का नाश

<b>सभी रसायन हम करी नहीं नाम सम कोय।</b> <b><br>रंचक घट मैं संचरै, सब तन कंचन होय।।</b><p>सारा संसार आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक रोगों से ग्रस्त है। कभी-कभी सभी …

भगवान जगन्नाथ के अद्भुत स्वरूप का रहस्य

<b>भगवान जगन्नाथ साक्षात् श्रीकृष्ण हैं</b><p><b>युग बीते संसार में पांचों तत्त्व समान।</b> <b><br>कभी न बदले प्रकृति और न श्रीभगवान।।</b><p>सबकुछ बदलने के बाद भी ईश्वर जो सतयुग, …

शनिदेव की दृष्टि में कौन-से कार्य हैं अपराध

<b>इन्द्रनीलद्युति: शूली वरदो गृध्रवाहन:।</b> <b><br>बाणबाणासनधर: कर्तव्योऽर्कसुतस्तथा।।</b><p>अर्थात्–शनैश्चर की शरीर-कान्ति इन्द्रनीलमणि की-सी है। वे गीध पर सवार होते …

नित्य सूर्यपूजा क्यों करनी चाहिए?

<b>प्रात: उठ श्रद्धा सहित, करें नमन आदित्य।</b> <b><br>नव प्रकाश नव चेतना, पावें जग में नित्य।। (स्वामी नर्मदानन्दजी सरस्वती)</b><p><b>प्रत्यक्ष देवता सूर्यनारायण</b><p>भगवान सूर्य …

श्रीराधा की परमप्रिय अष्टसखियां

<b>अष्टसखी करतीं सदा सेवा परम अनन्य,</b> <b><br>श्रीराधामाधव युगल की कर निज जीवन धन्य।</b> <b><br>जिनके चरण सरोज में बारम्बार प्रणाम,</b> <b><br>करुणा कर दें युगल पद-रज-रति अभिराम।।</b> …

कैसे करनी चाहिए नित्य सूर्यपूजा?

<b>महातेज, मार्तण्ड, मनोहर, महारोगहर।</b> <b><br>जयति सूर्यनारायण, जय जय सर्व सुखाकर।। (पद-रत्नाकर)</b><p>भगवान सूर्य साक्षात् परमात्मा का स्वरूप हैं। सूर्योपनिषद् में …

श्रीराधा : ध्यान, मन्त्र, गायत्री, स्तोत्र एवं आरती

<b>वन्दे वृन्दावनानन्दां राधिकां परमेश्वरीम्।</b> <b><br>गोपिकां परमां श्रेष्ठां ह्लादिनीं शक्तिरुपिणीम्।।</b><p>भगवान श्रीकृष्ण के वामभाग से परम शान्त, परम कमनीय …

भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहिनी दानलीला

<b>अरि तू दे जा दधि को दान,</b> <b><br>सुन गूजरि बरसाने की, तज बान ये तरसाने की।<br>हम नन्दगाँव के ग्वाला, हैं गइयन के प्रतिपाला,<br>दे जा तू गोरस को दान, सुन गूजरि बरसाने</b> …

गायत्री मन्त्र के चमत्कारी चौबीस अक्षर

<b>गायत्री वेदजननी गायत्री पापनाशिनी।</b> <b><br>गायत्र्या: परमं नास्ति दिवि चेह च पावनम्।। (शंखस्मृति)</b><p>अर्थात्–‘गायत्री वेदों की जननी है। गायत्री पापों का नाश करने …

चौबीस देवताओं के चौबीस गायत्री मन्त्र

<b>‘गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है, केशव से श्रेष्ठ कोई देवता नहीं है। गायत्री मन्त्र के जप से श्रेष्ठ कोई जप न आज तक हुआ है और न होगा।’</b><p><b>सर्वफलप्रदा,</b> …

भगवान शंकर, शुक्राचार्य और मृतसंजीवनी विद्या

<b>मृत्युंजयो मृत्युमृत्यु: कालकालो यमान्तक:।</b> <b><br>वेदस्त्वं वेदकर्ता च वेदवेदांगपारग:।। (हिमालयकृत शिवस्तोत्र ६)</b><p>अर्थात्–<b>‘हे परम शिव! आप मृत्युंजय होने के</b> …

सबसे ऊँची प्रेम सगाई

<b>सबसे ऊँची प्रेम सगाई।<br>दुर्योधन की मेवा त्यागी साग विदुर घर खाई॥<br>जूठे फल सबरी के खाये बहुबिधि स्वाद बताई।</b> <b><br>प्रेम के बस नृप सेवा कीनी आप बने हरि</b> …

शिवपंचाक्षर मन्त्र ‘नम: शिवाय’

<b>किं तस्य बहुभिर्मन्त्रै: किं तीर्थै: किं तपोऽध्वरै:।</b> <b><br>यस्यो नम: शिवायेति मन्त्रो हृदयगोचर:।। (स्कन्दपुराण)</b><p>अर्थात्–<b>‘जिसके हृदय में ‘ॐ नम: शिवाय’ यह</b> …

भगवान शिव का संसार को दान

<b>दानी कहुँ संकर-सम नाहीं</b> <b><br>दीन-दयाल दिबोई भावै, जाचक सदा सोहाहीं।। (विनय-पत्रिका)</b><p>भगवान शिव याचक के लिए कल्पतरु हैं। जैसे कल्पवृक्ष अपनी छाया में आए हुए …